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बारां में जलझूलनी एकादशी पर आस्था और शौर्य का संगम, डोल शोभायात्रा के साथ 18 दिवसीय मेले का आगाज

 

बारां शहर में जलझूलनी एकादशी के अवसर पर आस्था, परंपरा और शौर्य का अनोखा संगम देखने को मिला। हाड़ौती क्षेत्र की प्रसिद्ध डोल शोभायात्रा के साथ ही 18 दिवसीय डोल मेले का शुभारंभ हो गया। धार्मिक उत्सव को लेकर शहर में सुबह से ही श्रद्धालुओं और लोगों में खासा उत्साह नजर आया।

जलझूलनी एकादशी के अवसर पर विभिन्न मंदिरों से भगवान के डोल सजाकर शोभायात्रा निकाली गई। श्रद्धालु भजन-कीर्तन और धार्मिक जयकारों के साथ शोभायात्रा में शामिल हुए। शहर का माहौल भक्तिमय नजर आया और जगह-जगह लोगों ने शोभायात्रा का स्वागत किया।

डोल शोभायात्रा के दौरान हाड़ौती की पारंपरिक संस्कृति और शौर्य की झलक भी देखने को मिली। विभिन्न अखाड़ों और दलों ने अपने पारंपरिक करतब प्रस्तुत किए। युवाओं ने शस्त्र कला और अन्य हैरतअंगेज प्रदर्शन कर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। शोभायात्रा में धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय परंपराओं की झलक देखने को मिली।

डोल मेले को लेकर शहर में विशेष तैयारियां की गई हैं। 18 दिनों तक चलने वाले इस मेले में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। मेले में विभिन्न तरह की दुकानें, झूले और मनोरंजन के साधन आकर्षण का केंद्र रहेंगे। आसपास के क्षेत्रों से भी लोग डोल मेले में शामिल होने के लिए बारां पहुंचते हैं।

जलझूलनी एकादशी पर निकलने वाली डोल शोभायात्रा बारां की प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में शामिल है। हर साल इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। धार्मिक आयोजन के साथ मेले के शुरू होने से शहर में उत्सव का माहौल बन गया है।