×

खनन परियोजना के विरोध में 12 गांवों का बड़ा फैसला, वीडियो में जाने पंचायती राज चुनाव के बहिष्कार का ऐलान

 

जिले की पिंडवाड़ा तहसील में प्रस्तावित कमलेश मेटा कास्ट खनन परियोजना के विरोध में 12 गांवों के ग्रामीणों ने बड़ा फैसला लिया है। ग्रामीणों ने पंचायती राज चुनाव में मतदान का बहिष्कार करने का ऐलान किया है। रविवार देर शाम आयोजित सामूहिक बैठक में ग्रामीणों ने एकजुट होकर निर्णय लिया कि जब तक प्रस्तावित खनन परियोजना को रद्द नहीं किया जाता, तब तक वे क्षेत्र में चुनाव का विरोध करेंगे।ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन केवल आगामी चुनाव तक सीमित नहीं रहेगा। उनका कहना है कि यदि कमलेश मेटा परियोजना निरस्त नहीं की गई तो वे भविष्य में होने वाले पंचायती राज के हर चुनाव का बहिष्कार करेंगे। ग्रामीणों ने राजनीतिक दलों और नेताओं के प्रति भी नाराजगी जताई है।

12 गांवों के ग्रामीणों ने बनाई रणनीति

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/gWK2aQX4OU4?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/gWK2aQX4OU4/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

रविवार शाम हुई बैठक में 12 गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। बैठक में खनन परियोजना को लेकर अब तक सामने आई आपत्तियों और ग्रामीणों की चिंताओं पर चर्चा की गई। इसके बाद सर्वसम्मति से चुनाव बहिष्कार का निर्णय लिया गया।ग्रामीणों ने कहा कि वे एकजुट होकर चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार करेंगे। उन्होंने यह भी घोषणा की कि परियोजना रद्द होने तक गांवों में आने वाले नेताओं का विरोध किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांग को नजरअंदाज कर राजनीतिक दलों के नेता गांवों में प्रचार या संपर्क करने आते हैं तो उन्हें इसका विरोध झेलना पड़ेगा।

परियोजना रद्द होने तक जारी रहेगा विरोध

ग्रामीणों ने कहा कि उनका मुख्य मुद्दा प्रस्तावित कमलेश मेटा कास्ट खनन परियोजना है। जब तक परियोजना को पूरी तरह निरस्त नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।ग्रामीणों के मुताबिक उन्होंने पहले भी इस मामले को लेकर अपनी आपत्तियां और समस्याएं संबंधित अधिकारियों के सामने रखी हैं। अब चुनाव बहिष्कार के फैसले के जरिए वे प्रशासन और सरकार तक अपनी मांग मजबूती से पहुंचाना चाहते हैं।ग्रामीणों ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मतदान महत्वपूर्ण है, लेकिन उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में उन्होंने सामूहिक रूप से चुनाव से दूरी बनाने का निर्णय लिया है।

सोमवार को कलेक्टर से मिलेंगे ग्रामीण

खनन परियोजना के विरोध को लेकर ग्रामीण सोमवार को जिला कलेक्टर से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं और मांगों से अवगत कराएंगे।ग्रामीणों की ओर से अब तक इस मामले में हुई जांच, प्रगति और समीक्षा से संबंधित रिपोर्ट भी कलेक्टर के सामने प्रस्तुत की जाएगी। उनका प्रयास रहेगा कि प्रशासन उनकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार करे और परियोजना को लेकर स्थिति स्पष्ट करे।

नेताओं के गांव में प्रवेश का भी विरोध

ग्रामीणों ने बैठक में यह भी निर्णय लिया कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, वे क्षेत्र में राजनीतिक नेताओं के प्रवेश का विरोध करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के दौरान नेता वोट मांगने गांवों में आते हैं, लेकिन स्थानीय लोगों की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो रहा है।इसी नाराजगी के चलते ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार के साथ नेताओं के विरोध का भी ऐलान किया है। उनका कहना है कि सभी 12 गांव इस फैसले पर एकजुट हैं।

प्रशासन के सामने बढ़ी चुनौती

12 गांवों के ग्रामीणों की ओर से चुनाव बहिष्कार की घोषणा के बाद प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ गई है। सोमवार को कलेक्टर के साथ होने वाली ग्रामीणों की बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ग्रामीण अपनी मांगों के साथ अब तक की जांच और प्रगति से जुड़ी रिपोर्ट भी अधिकारियों को सौंपेंगे।फिलहाल ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि कमलेश मेटा कास्ट परियोजना रद्द होने तक उनका विरोध जारी रहेगा। आगामी दिनों में प्रशासन की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाया जाता है, इस पर ग्रामीणों के साथ-साथ पूरे क्षेत्र की नजर रहेगी।