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सुखबीर बादल का अमृतपाल सिंह पर निशाना, वीडियो में बोले- ‘वारिस पंजाब दे’ का मकसद बंदी सिखों की रिहाई नहीं

 

मुक्तसर में बुधवार को शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने खालिस्तान समर्थक सांसद अमृतपाल सिंह और अकाली दल से अलग संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन का मुख्य उद्देश्य बंदी सिखों की रिहाई नहीं, बल्कि अमृतपाल सिंह को जेल से बाहर लाना और उसे पंजाब की राजनीति में आगे बढ़ाना है। सुखबीर बादल ने कहा कि अमृतपाल को जेल गए अभी करीब दो साल ही हुए हैं और अब उसकी रिहाई के लिए लगातार आवाज उठाई जा रही है।सुखबीर बादल ने कहा कि ‘वारिस पंजाब दे’ के लोग बंदी सिखों की रिहाई की बात कर रहे हैं, लेकिन जिन सिख कैदियों को जेल में 20-20 साल हो चुके हैं, उनके लिए पहले आवाज क्यों नहीं उठाई गई। उन्होंने सवाल किया कि जब अमृतपाल का परिवार कांग्रेस से जुड़ा हुआ था, तब इन लोगों ने लंबे समय से जेल में बंद सिखों की रिहाई के लिए कोई बड़ा अभियान क्यों नहीं चलाया।

अमृतपाल को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाने का आरोप

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अकाली दल प्रधान ने दावा किया कि ‘वारिस पंजाब दे’ का पूरा जोर अमृतपाल की रिहाई और उसे पंजाब के मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाने पर है। उन्होंने कहा कि संगठन अब खुद को पंजाब के लोगों का ‘वारिस’ बताकर राजनीति में जगह बनाने की कोशिश कर रहा है।सुखबीर बादल ने अमृतपाल की तुलना पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से करते हुए कहा कि अमृतपाल भगवंत मान से भी बदतर साबित होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों का उद्देश्य पंजाब का भला करना नहीं, बल्कि शिरोमणि अकाली दल को कमजोर और खत्म करना है।

अमृतपाल के पंजाब आने पर भी उठाए सवाल

सुखबीर बादल ने अमृतपाल के 2022 में दुबई से पंजाब आने का जिक्र करते हुए उसके अतीत को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब अमृतपाल दुबई से आया तो उसके बाल कटे हुए थे और वह क्लीन शेव था। उस समय किसी को उसके अतीत के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी।उन्होंने सवाल उठाया कि अमृतपाल कहां से आया, वहां क्या करता रहा, पंजाब क्यों आया और यहां तक कैसे पहुंचा। सुखबीर बादल ने कहा कि पंजाब आने के बाद उसने खुद को पंजाब का ‘वारिस’ बताना शुरू कर दिया।

गुरु ग्रंथ साहिब को लेकर भी टिप्पणी

सुखबीर बादल ने अमृतपाल और उसके समर्थकों के तौर-तरीकों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज को आगे रखकर खुद पीछे रहकर इस तरह की गतिविधियां करते हैं। उन्होंने अमृतपाल के उस दौर का भी जिक्र किया, जब वह नशे के खिलाफ अभियान और नशा छुड़ाने की बातें करता था।

सुखबीर बादल ने कहा कि पंजाब की राजनीति में धार्मिक भावनाओं और युवाओं के मुद्दों का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने अकाली दल को पंजाब की पुरानी राजनीतिक ताकत बताते हुए कहा कि पार्टी को कमजोर करने की कोशिशों का राजनीतिक स्तर पर जवाब दिया जाएगा।हालांकि, सुखबीर बादल के आरोपों पर अमृतपाल सिंह या ‘वारिस पंजाब दे’ की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि सुखबीर बादल के इन बयानों के बाद पंजाब की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर आगे किस तरह की प्रतिक्रिया सामने आती है।