अमृतसर FIR की जांच पर उठे सवाल, पीड़ित परिवार ने NHRC और पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का खटखटाया दरवाजा
एक मामले में पुलिस जांच को लेकर पीड़ित परिवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC और पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का रुख किया है। परिवार का आरोप है कि अमृतसर के सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR नंबर 77 की जांच में स्थानीय पुलिस ने निष्पक्षता नहीं बरती। यह FIR 29 अप्रैल 2026 को दर्ज की गई थी। परिजनों ने जांच के दौरान पक्षपात करने, दबाव बनाने और मामले की उचित तरीके से जांच नहीं करने का आरोप लगाया है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि घटना के बाद उन्हें उम्मीद थी कि पुलिस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जांच करेगी। इसके लिए परिवार की ओर से जांच में सहयोग भी किया गया, लेकिन समय बीतने के साथ उन्हें पुलिस की कार्रवाई को लेकर कई तरह की आशंकाएं होने लगीं। परिजनों का आरोप है कि जांच के दौरान कुछ पक्षों के प्रति पुलिस का रवैया कथित तौर पर नरम रहा, जबकि उनकी शिकायतों और दावों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
पुलिस जांच पर परिवार ने उठाए सवाल
परिवार ने आरोप लगाया है कि FIR दर्ज होने के बावजूद जांच उस दिशा में आगे नहीं बढ़ी, जिसकी उनसे उम्मीद थी। उनका दावा है कि मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों और संभावित साक्ष्यों की पर्याप्त जांच नहीं की गई। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें दबाव में लेने का प्रयास किया गया।परिवार के मुताबिक, जब उन्हें लगा कि स्थानीय स्तर पर उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है, तब उन्होंने उच्च अधिकारियों और संवैधानिक संस्थाओं का रुख करने का फैसला किया। इसी क्रम में NHRC और पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के सामने अपनी शिकायत रखने की प्रक्रिया शुरू की गई।
29 अप्रैल को दर्ज हुई थी FIR
मामले में अमृतसर के सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में FIR नंबर 77 दर्ज की गई थी। FIR की तारीख 29 अप्रैल 2026 बताई गई है। परिवार अब इस जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रहा है और चाहता है कि पूरे मामले की जांच स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से हो।परिजनों का कहना है कि यदि स्थानीय पुलिस पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है तो मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। उनका यह भी कहना है कि जांच में किसी भी तरह का दबाव या पक्षपात न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
NHRC और हाई कोर्ट से हस्तक्षेप की उम्मीद
पीड़ित परिवार ने NHRC और पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर मामले में उचित हस्तक्षेप की मांग की है। परिवार चाहता है कि उनकी शिकायतों और पुलिस जांच से जुड़े आरोपों की गंभीरता से समीक्षा की जाए।परिजनों के मुताबिक, उनका मुख्य उद्देश्य किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान करना नहीं, बल्कि मामले की सच्चाई सामने लाना और पीड़ित को न्याय दिलाना है। वे चाहते हैं कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़े और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या पक्षपात हुआ है तो उसकी भी जिम्मेदारी तय की जाए।
फिलहाल इस मामले में परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों पर आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। पुलिस जांच को लेकर उठे सवालों के बीच यह देखना अहम होगा कि NHRC और हाई कोर्ट के समक्ष मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है। हालांकि, पुलिस पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। परिवार की शिकायत और कानूनी कार्रवाई के बाद अब मामले में निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है।