चंडीगढ़ में औद्योगिक भूखंडों के विभाजन की नई नीति की तैयारी, MSME को मिलेगा बड़ा फायदा
Chandigarh प्रशासन औद्योगिक क्षेत्र को और अधिक लचीला और व्यवसाय-अनुकूल बनाने के लिए एक नई नीति लाने की तैयारी में है। इस प्रस्तावित नीति के तहत एक कनाल या उससे बड़े औद्योगिक भूखंडों को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित करने की अनुमति दी जा सकती है, जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।प्रशासन के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक भूमि के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करना और छोटे उद्यमियों के लिए निवेश की बाधाओं को कम करना है। अभी तक बड़े प्लॉट्स की उच्च लागत और सीमित उपलब्धता के कारण कई छोटे कारोबारी औद्योगिक क्षेत्रों में अपनी इकाई स्थापित नहीं कर पाते थे। नई नीति इस समस्या को काफी हद तक दूर कर सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था में यह स्पष्ट किया जाएगा कि किस आकार के भूखंड को कितने हिस्सों में बांटा जा सकता है और इसके लिए क्या तकनीकी व कानूनी मानक होंगे। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि विभाजन के बाद बुनियादी सुविधाएं जैसे सड़क, बिजली, पानी और ड्रेनेज व्यवस्था प्रभावित न हों।औद्योगिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से Chandigarh में स्टार्टअप्स और छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। इससे रोजगार सृजन में भी मदद मिलेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
Micro, Small and Medium Enterprises (MSME) सेक्टर लंबे समय से औद्योगिक भूमि की उपलब्धता और लागत को लेकर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में यह नीति छोटे उद्यमियों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है।प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि नीति को अंतिम रूप देने से पहले विभिन्न औद्योगिक संगठनों और हितधारकों से सुझाव लिए जा रहे हैं। इसके बाद इसे औपचारिक रूप से लागू किया जाएगा।
हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भूखंडों के अत्यधिक विभाजन से भविष्य में नियोजन और औद्योगिक संरचना पर असर पड़ सकता है, इसलिए नीति में संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा।फिलहाल प्रस्ताव पर काम जारी है और उम्मीद की जा रही है कि इसे जल्द ही मंजूरी के लिए आगे बढ़ाया जाएगा। यह कदम चंडीगढ़ के औद्योगिक विकास में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है।