×

पंजाब कांग्रेस में बढ़ी अंदरूनी खींचतान, चन्नी-वड़िंग गुट आमने-सामने; वीडियो में जाने भूपेश बघेल करेंगे 9 दिन तक ग्राउंड सर्वे

 

पंजाब कांग्रेस में विधानसभा चुनाव से पहले नेतृत्व को लेकर अंदरूनी सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के समर्थक गुट अब खुलकर अपनी-अपनी ताकत दिखाने में जुट गए हैं। दोनों खेमे पार्टी हाईकमान के सामने खुद को सबसे मजबूत साबित करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर खींचतान और बढ़ गई है।

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/zJAuAX_beyg?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/zJAuAX_beyg/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

सूत्रों के मुताबिक, चन्नी गुट का मानना है कि अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व में कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव नहीं जीत सकती। इसी वजह से यह गुट लगातार पार्टी नेतृत्व पर वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने का दबाव बना रहा है। उनका तर्क है कि चुनाव से पहले संगठन में बदलाव कर मजबूत नेतृत्व देने की जरूरत है।

दूसरी ओर, राजा वड़िंग गुट खुद को संगठन में सबसे प्रभावशाली साबित करने में जुटा है। वड़िंग समर्थकों का दावा है कि उन्हें अधिकांश जिला कांग्रेस अध्यक्षों, स्थानीय नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं का समर्थन प्राप्त है। उनका कहना है कि प्रदेश संगठन को मजबूत करने में वड़िंग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और चुनाव से पहले नेतृत्व बदलना पार्टी के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

बताया जा रहा है कि हाल ही में दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ हुई बैठकों में भी इस मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच काफी तीखी चर्चा हुई। नेतृत्व को लेकर बनी असहमति अब पार्टी के भीतर खुलकर सामने आने लगी है। इसी राजनीतिक खींचतान के बीच पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल शुक्रवार से नौ दिन के पंजाब दौरे पर पहुंच रहे हैं। उनका यह दौरा पार्टी संगठन और जमीनी हालात का आकलन करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भूपेश बघेल अपने दौरे के दौरान बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं, जिला पदाधिकारियों, स्थानीय नेताओं और संगठन के विभिन्न वर्गों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे यह जानने की कोशिश करेंगे कि प्रदेश में कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच किस नेता की स्वीकार्यता अधिक है और संगठन की वास्तविक स्थिति क्या है।सूत्रों के अनुसार, बघेल अपने दौरे के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट कांग्रेस हाईकमान को सौंपेंगे। इस रिपोर्ट में संगठन की स्थिति, कार्यकर्ताओं की राय और नेतृत्व को लेकर जमीनी फीडबैक शामिल होगा। माना जा रहा है कि इसी रिपोर्ट के आधार पर हाईकमान पंजाब कांग्रेस के भविष्य के नेतृत्व और चुनावी रणनीति पर महत्वपूर्ण फैसला ले सकता है।

पंजाब में कांग्रेस पहले ही सत्ता से बाहर है और आगामी विधानसभा चुनाव पार्टी के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। ऐसे में संगठन के भीतर जारी गुटबाजी पार्टी की चुनावी तैयारियों पर असर डाल सकती है। अब सभी की नजर भूपेश बघेल के दौरे और उनकी रिपोर्ट पर टिकी है, क्योंकि इससे यह तय हो सकता है कि कांग्रेस चुनाव में किस नेतृत्व के साथ मैदान में उतरेगी।