पंजाब में निजी स्कूलों की फीस पर सरकार सख्त, CM भगवंत मान बोले- शिक्षा को व्यापार नहीं बनने देंगे
पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर सख्ती दिखाते हुए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट कहा कि "शिक्षा को व्यापार बनने की इजाजत नहीं दी जा सकती।" उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े और फीस बढ़ोतरी पूरी तरह नियमों के तहत हो।
फीस बढ़ोतरी की होगी गहन जांच
मुख्यमंत्री ने बताया कि उपायुक्त (डीसी) की अध्यक्षता में गठित रेगुलेटरी कमेटियां निजी स्कूलों द्वारा की गई फीस वृद्धि की बारीकी से जांच करेंगी। यदि किसी स्कूल द्वारा नियमों का उल्लंघन या मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने का मामला सामने आता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य निजी शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
10 दिन में अपलोड करना होगा 4 साल का रिकॉर्ड
पंजाब सरकार ने सभी निजी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे अगले 10 दिनों के भीतर सरकार के निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल पर पिछले चार वर्षों में की गई फीस बढ़ोतरी का पूरा रिकॉर्ड अपलोड करें।
इस रिकॉर्ड के आधार पर रेगुलेटरी कमेटियां यह जांच करेंगी कि फीस में की गई बढ़ोतरी नियमों और निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं।
अभिभावकों के हितों की रक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा सेवा का माध्यम है, इसे मुनाफा कमाने का जरिया नहीं बनने दिया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाए और किसी भी शिकायत का समय पर समाधान किया जाए।
निजी स्कूलों में जवाबदेही बढ़ाने की तैयारी
सरकार का मानना है कि फीस संबंधी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और स्कूलों की जवाबदेही भी तय होगी। साथ ही, अभिभावकों को भी यह जानने में आसानी होगी कि स्कूलों ने बीते वर्षों में कितनी और किस आधार पर फीस बढ़ाई है।
पंजाब सरकार का कहना है कि यदि जांच में किसी स्कूल द्वारा अनियमितता या मनमानी फीस वसूली का मामला सामने आता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।