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पंजाब कांग्रेस में बढ़ी गुटबाजी: चन्नी-वड़िंग के बीच सुलह कराने उतरे हाईकमान के रणनीतिकार, वीडियो में जाने भूपेश बघेल करेंगे 9 दिन का दौरा

 

पंजाब कांग्रेस में आंतरिक गुटबाजी लगातार गहराती जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच बढ़ती दूरियों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच राजनीतिक खींचतान खुलकर सामने आने लगी है, जिसके बाद अब कांग्रेस हाईकमान ने हालात संभालने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं।

सूत्रों के अनुसार, चरणजीत सिंह चन्नी का गुट अब पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग अपनी राजनीतिक गतिविधियां संचालित कर रहा है। बताया जा रहा है कि चन्नी अपने अलग कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं, जिससे संगठन के भीतर समानांतर शक्ति केंद्र बनने की चर्चा तेज हो गई है।

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सुलह की जिम्मेदारी नरेश अरोड़ा को

पंजाब कांग्रेस में बढ़ती खाई को पाटने के लिए पार्टी हाईकमान ने राजनीतिक रणनीतिकार नरेश अरोड़ा को जिम्मेदारी सौंपी है। बताया जा रहा है कि नरेश अरोड़ा ने दोनों नेताओं के बीच संवाद की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है और चरणजीत सिंह चन्नी तथा राजा वड़िंग के बीच एक बैठक भी करवा चुके हैं।पार्टी नेताओं का मानना है कि यदि समय रहते दोनों गुटों के बीच मतभेद दूर नहीं किए गए तो इसका असर आगामी चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है।

कर्नाटक मॉडल पंजाब में लागू करने की तैयारी

नरेश अरोड़ा को कांग्रेस के ऐसे रणनीतिकार के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार के बीच सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उस रणनीति को कांग्रेस की जीत का अहम कारण माना गया था।अब कांग्रेस हाईकमान पंजाब में भी उसी 'कर्नाटक फॉर्मूला' को लागू करने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, नरेश अरोड़ा जल्द ही पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर संगठन में एकजुटता का रोडमैप साझा करेंगे।

भूपेश बघेल करेंगे 9 दिन का दौरा

पार्टी हाईकमान के निर्देश पर पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल गुरुवार को चंडीगढ़ पहुंचेंगे। इसके बाद वह अगले 9 दिनों तक पंजाब के विभिन्न जिलों का दौरा करेंगे।इस दौरान बघेल पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और स्थानीय पदाधिकारियों से मुलाकात कर गुटबाजी की जमीनी स्थिति, उसके प्रभाव और संगठन की मौजूदा स्थिति का आकलन करेंगे। दौरे के बाद वह अपनी विस्तृत रिपोर्ट कांग्रेस हाईकमान को सौंपेंगे।

रिपोर्ट के बाद हो सकता है बड़ा फैसला

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि भूपेश बघेल की रिपोर्ट के आधार पर हाईकमान पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव या गुटबाजी समाप्त करने के लिए बड़े फैसले ले सकता है। पार्टी नेतृत्व की प्राथमिकता आगामी चुनावों से पहले संगठन को एकजुट करना और नेताओं के बीच तालमेल स्थापित करना है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस पंजाब में आंतरिक मतभेदों को समय रहते दूर करने में सफल रहती है, तो इससे पार्टी को राजनीतिक मजबूती मिल सकती है। अब सभी की नजरें भूपेश बघेल के दौरे और उसके बाद हाईकमान के संभावित फैसलों पर टिकी हैं।