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पंजाब में DA को लेकर बढ़ा विवाद, IAS-IPS को मिल रहा केंद्रीय महंगाई भत्ता; लाखों कर्मचारी और पेंशनभोगी इंतजार में

 

पंजाब में महंगाई भत्ते (DA) को लेकर राज्य सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कर्मचारी यूनियनों की कई बार मांगों और अदालत के फैसलों के बावजूद पंजाब सरकार ने अभी तक अपने नियमित कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए लंबित DA संशोधन को लागू नहीं किया है। इससे प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और रिटायर्ड कर्मचारियों में नाराजगी देखने को मिल रही है।

सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि पंजाब में तैनात IAS और IPS अधिकारियों को ऑल इंडिया सर्विसेज के तहत केंद्र सरकार के अनुसार बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता मिल रहा है, जबकि राज्य सरकार के करीब 3.5 लाख कर्मचारी और 4 लाख से ज्यादा पेंशनभोगी संशोधित DA का इंतजार कर रहे हैं।

लाखों कर्मचारियों को नहीं मिला DA संशोधन का लाभ

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि राज्य सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को लंबे समय से DA की संशोधित किस्तों का लाभ नहीं मिला है। बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों का तर्क है कि DA उनके वेतन और पेंशन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो जीवन-यापन की बढ़ती लागत को संतुलित करने में मदद करता है।यूनियनों का आरोप है कि सरकार की देरी के कारण कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि जब केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों के लिए समय-समय पर DA में संशोधन करती है, तो राज्य सरकार को भी उसी आधार पर फैसला लेना चाहिए।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद भी लागू नहीं हुआ आदेश

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले के बाद उम्मीद जताई गई थी कि राज्य सरकार DA संशोधन को लागू करेगी। रिपोर्टों के अनुसार, इस फैसले से प्रदेश के 7.5 लाख से ज्यादा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को फायदा मिल सकता था।हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है। इसके चलते कर्मचारी संगठनों ने एक बार फिर सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की है।

IAS-IPS और राज्य कर्मचारियों में अंतर को लेकर सवाल

कर्मचारी संगठनों ने इस बात पर भी सवाल उठाए हैं कि एक ही राज्य में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के DA में अंतर क्यों है। उनका कहना है कि जहां अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों को केंद्र के नियमों के अनुसार DA मिल रहा है, वहीं राज्य सरकार के कर्मचारी पुराने DA ढांचे में फंसे हुए हैं।यूनियनों का कहना है कि इससे कर्मचारियों के बीच असमानता की भावना पैदा हो रही है और सरकार को इस मामले में जल्द समाधान निकालना चाहिए।

सरकार के सामने आर्थिक चुनौती

वहीं, राज्य सरकार के सामने वित्तीय स्थिति भी एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है। DA संशोधन लागू करने से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। सरकार को कर्मचारियों की मांग और राज्य की आर्थिक स्थिति के बीच संतुलन बनाना होगा।हालांकि कर्मचारी संगठनों का कहना है कि DA कोई अतिरिक्त लाभ नहीं बल्कि कर्मचारियों का अधिकार है और इसे लंबे समय तक रोका नहीं जाना चाहिए।

आगे की रणनीति पर कर्मचारी संगठनों की नजर

अब सभी की नजर पंजाब सरकार के अगले कदम पर है। कर्मचारी संगठन पहले ही संकेत दे चुके हैं कि अगर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो वे आंदोलन की रणनीति बना सकते हैं।DA संशोधन का मुद्दा आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति और कर्मचारी संगठनों के बीच एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। लाखों कर्मचारी और पेंशनभोगी सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।