×

पंजाब कांग्रेस में फिर बढ़ी कलह, फुटेज में जाने चरणजीत चन्नी ने कैंपेन कमेटी पद छोड़ने की पेशकश की, भूपेश बघेल पर उठे सवाल

 

पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है। आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच पार्टी में गुटबाजी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। चुनाव कैंपेन कमेटी के चेयरमैन बनाए गए पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी है। चन्नी का कहना है कि वह पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर ही पार्टी के लिए प्रचार कर सकते हैं।

जानकारी के मुताबिक, चन्नी ने शनिवार को चंडीगढ़ में विधायक राणा गुरजीत सिंह के घर हुई बैठक के दौरान अपना पद छोड़ने की इच्छा जाहिर की। इस दौरान उन्होंने संकेत दिया कि अगर पार्टी में जिम्मेदारी निभाने को लेकर असहज स्थिति है तो वह पद से हटकर भी कांग्रेस के लिए काम करते रहेंगे।

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/13aryyhRov4?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/13aryyhRov4/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

चन्नी के इस कदम के बाद पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। पार्टी के भीतर पहले से चल रही गुटबाजी को खत्म करने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल को जिम्मेदारी सौंपी थी। लेकिन अब पार्टी सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि हाईकमान बघेल के कामकाज से नाराज है।

सूत्रों के अनुसार, बघेल को पंजाब में कांग्रेस की गुटबाजी खत्म करने के लिए भेजा गया था और इसके लिए उन्हें करीब पांच दिन का समय दिया गया था। लेकिन पार्टी के अंदरूनी मतभेद कम होने के बजाय और बढ़ गए। आरोप है कि बघेल दोनों गुटों के बीच संतुलन बनाने में सफल नहीं हो सके।

चन्नी गुट में पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और विधायक प्रगट सिंह जैसे बड़े नेता शामिल हैं। इसके बावजूद आरोप है कि बघेल ने शुरुआत में इस गुट को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।

बताया जा रहा है कि बघेल ने अपने पंजाब दौरे के शुरुआती चार दिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के गुट के नेताओं के साथ मुलाकातों में बिताए। इस दौरान चन्नी गुट, जिसके साथ कई विधायक और सांसद बताए जा रहे हैं, को ज्यादा तवज्जो नहीं मिलने से नाराजगी बढ़ गई।

हालांकि, दौरे के आखिरी दिन बघेल ने चन्नी गुट के नेताओं से मुलाकात की, लेकिन दोनों गुटों को एक साथ बैठाकर बातचीत कराने में सफलता नहीं मिली। पार्टी के भीतर चल रही दूरी कम करने के लिए किसी साझा मंच की कोशिश भी पूरी नहीं हो सकी।

इसके बाद एक और विवाद तब खड़ा हुआ, जब चन्नी गुट से मुलाकात के बाद भूपेश बघेल को राजा वड़िंग के साथ एक वाहन में जाते देखा गया। इसे चन्नी समर्थक नेताओं ने अपनी नाराजगी बढ़ाने वाला कदम माना।

फिलहाल पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व और रणनीति को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती आपसी मतभेद खत्म कर एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरने की है। अब देखना होगा कि कांग्रेस हाईकमान इस अंदरूनी संकट को किस तरह संभालता है और क्या चरणजीत चन्नी अपने पद पर बने रहते हैं या इस्तीफा स्वीकार किया जाता है।