पंजाब में मुख्यमंत्री पर विपक्ष का आरोप, राज्यपाल से बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात
Punjab की राजनीति में उस समय गर्माहट बढ़ गई जब मुख्यमंत्री Bhagwant Mann को लेकर विपक्षी दलों ने गंभीर आरोप लगाए। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ओर से दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री विधानसभा सत्र के दौरान कथित रूप से नशे की हालत में उपस्थित थे। हालांकि, इस आरोप को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और राज्य सरकार ने भी इस पर स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है।
इस विवाद के बीच बीजेपी के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात की और मामले में हस्तक्षेप की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि विधानसभा जैसे संवैधानिक मंच पर इस तरह की कथित घटनाएं लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ हैं और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि यदि यह मामला सही पाया जाता है तो यह गंभीर अनुशासनहीनता का विषय है, जो राज्य की छवि को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने यह भी मांग की कि विधानसभा कार्यवाही की जांच की जाए और संबंधित सीसीटीवी फुटेज तथा रिकॉर्डिंग की समीक्षा की जाए।
वहीं, सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) की ओर से इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया जा रहा है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि विपक्ष मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के बयान दे रहा है, जबकि सरकार राज्य में विकास और जनहित के कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में हाल के समय में सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ा है और ऐसे आरोप-प्रत्यारोप राजनीतिक माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, विधानसभा जैसे संवैधानिक संस्थानों से जुड़े मामलों में बयानबाजी से पहले तथ्यों की पुष्टि बेहद जरूरी होती है।
राज्यपाल से मुलाकात के बाद बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
इस पूरे घटनाक्रम पर अभी मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, सरकार के करीबी सूत्रों का कहना है कि विपक्ष बिना आधार के आरोप लगाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है।
फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और बयानबाजी तेज होने की संभावना है। राज्य में पहले से ही कई मुद्दों को लेकर सियासी माहौल गरम है, ऐसे में यह विवाद और भी अधिक राजनीतिक तनाव पैदा कर सकता है।