स्कूलों की मनमानी पर भड़के पैरेंट्स, किताबों की कीमत सुन उड़े होश; सोशल मीडिया पर बयां किया दर्द
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक मुद्दा तेजी से चर्चा में है, जिसमें पैरेंट्स ने स्कूलों द्वारा तय की जा रही किताबों की कीमतों और फीस संरचना को लेकर नाराजगी जाहिर की है। कई अभिभावकों ने दावा किया है कि स्कूलों की ओर से दी जाने वाली किताबों की कॉस्ट इतनी ज्यादा है कि सामान्य परिवारों के लिए इसे वहन करना मुश्किल हो रहा है।
मामले के अनुसार, कुछ पैरेंट्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट और वीडियो साझा कर बताया कि स्कूल द्वारा निर्धारित किताबें और स्टेशनरी बाजार की तुलना में काफी महंगी मिल रही हैं। इस वजह से बच्चों की शिक्षा का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है और परिवारों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है।
अभिभावकों का कहना है कि वे बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए हर संभव प्रयास करते हैं, लेकिन हर साल बढ़ती किताबों की कीमतें और अन्य शुल्क उन्हें परेशान कर रहे हैं। कई पैरेंट्स ने इसे “स्कूलों की मनमानी” करार देते हुए इस पर नियंत्रण की मांग की है।
सोशल मीडिया पर इस मुद्दे के वायरल होने के बाद यूजर्स की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोग पैरेंट्स की बातों से सहमत नजर आ रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि गुणवत्ता और अपडेटेड सिलेबस के कारण कीमतें बढ़ती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि निजी स्कूलों की फीस और किताबों की लागत को लेकर अक्सर विवाद सामने आते रहते हैं। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और रेगुलेशन की जरूरत होती है, ताकि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।
कुल मिलाकर, यह मामला एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था में लागत और पारदर्शिता को लेकर बहस छेड़ता है और सोशल मीडिया के जरिए पैरेंट्स की आवाज को व्यापक स्तर पर सामने लाता है।