×

पुरी में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा आज, वीडियो में जाने मौसी के घर जाएंगे महाप्रभु; जानिए कैसे बनते हैं करोड़ों आस्था से जुड़े रथ

 

ओडिशा के पुरी में आज विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथयात्रा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ अलग-अलग भव्य रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे। हिंदू मान्यताओं और लोक परंपरा के अनुसार, गुंडिचा मंदिर को भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है। लाखों श्रद्धालु महाप्रभु के दर्शन और रथ खींचने के लिए पुरी पहुंचे हैं।

सात दिन मौसी के घर रहेंगे भगवान

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/Gyu8RkMyDOs?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/Gyu8RkMyDOs/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा गुंडिचा मंदिर में सात दिनों तक विराजमान रहेंगे। इसके बाद 24 जुलाई को बहुड़ा यात्रा (वापसी यात्रा) के तहत तीनों देवता पुनः श्रीमंदिर लौटेंगे। परंपरा के अनुसार, मुख्य मंदिर पहुंचने के बाद भी भगवान दो दिनों तक अपने-अपने रथों पर ही विराजमान रहते हैं। इसके बाद 27 जुलाई को विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ उनका मंदिर में पुनः प्रवेश कराया जाएगा।

रथों की भी होती है विशेष नीलामी

रथयात्रा संपन्न होने के कुछ समय बाद मंदिर प्रशासन रथों को खोलने की प्रक्रिया शुरू करता है। इसके बाद रथों के कुछ हिस्सों की बिक्री की जाती है, जिन्हें श्रद्धालु शुभ और पवित्र मानकर खरीदते हैं।पिछले वर्ष यानी 2025 में भगवान जगन्नाथ के रथ के एक पहिए की न्यूनतम कीमत 3 लाख रुपये तय की गई थी। वहीं भगवान बलभद्र के रथ के पहिए की कीमत 2 लाख रुपये, जबकि देवी सुभद्रा के रथ के पहिए की कीमत 1.5 लाख रुपये रखी गई थी। इन पवित्र अवशेषों को खरीदने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिलता है।

13 तरह की लकड़ियों से बनते हैं रथ

भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ हर वर्ष नए बनाए जाते हैं। इनके निर्माण के लिए ओडिशा वन विभाग मंदिर प्रशासन को बिना किसी शुल्क के लकड़ियां उपलब्ध कराता है।सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, रथ निर्माण में 13 प्रकार के पेड़ों की लकड़ियों का उपयोग किया जाता है। इनमें फासी, धौरा, आसन, मोई, सिमिली, साल, गम्भारी, कदंब और देवदारु सहित अन्य प्रजातियों की लकड़ियां शामिल होती हैं। प्रत्येक लकड़ी का चयन उसकी मजबूती और धार्मिक परंपरा के अनुसार किया जाता है।

विशेष पूजा के बाद शुरू होता है निर्माण

रथ निर्माण की प्रक्रिया भी धार्मिक विधि-विधान के साथ शुरू होती है। बसंत पंचमी के दिन रथ निर्माण के लिए लाई गई लकड़ियों की विशेष पूजा की जाती है। इसके बाद रामनवमी के अवसर पर पूजा-अर्चना के साथ तीन धौरा लकड़ियों की चिराई कर रथ निर्माण का शुभारंभ होता है।

भविष्य के लिए चल रहा है विशेष प्रोजेक्ट

रथ निर्माण के लिए आवश्यक लकड़ियों की भविष्य में कमी न हो, इसके लिए ओडिशा सरकार विशेष वन संरक्षण और वृक्षारोपण परियोजना चला रही है। इस योजना के तहत उन पेड़ों की बड़े पैमाने पर रोपाई की जा रही है जिनकी लकड़ी रथ निर्माण में उपयोग होती है। इसका उद्देश्य सदियों पुरानी इस परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित बनाए रखना है।हर वर्ष आयोजित होने वाली जगन्नाथ रथयात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा, शिल्पकला और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस दिव्य आयोजन के साक्षी बनने पुरी पहुंचते हैं और महाप्रभु के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त करते हैं