मानसून से पहले लापरवाही! कचरे और मलबे से अटा रविंद्र भवन का मुख्य नाला, जलभराव का बढ़ा खतरा
मानसून की दस्तक से पहले राजधानी भोपाल में नालों की सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं। शहर के प्रमुख जल निकासी मार्गों में शामिल रविंद्र भवन के पास स्थित मुख्य नाला इन दिनों कचरे और मलबे से अटा पड़ा है। यह नाला मानसून के दौरान शहर के करीब 30 प्रतिशत बरसाती पानी की निकासी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
जानकारों के मुताबिक बाणगंगा क्षेत्र से आने वाला बरसाती पानी इसी नाले के माध्यम से रविंद्र भवन के पास से गुजरते हुए छोटे तालाब तक पहुंचता है। इसके बाद छोटे तालाब का ओवरफ्लो पानी पातरा नाले के जरिए शहर से बाहर निकलता है। ऐसे में इस नाले का सुचारु रूप से कार्य करना शहर की जल निकासी व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है।
मौजूदा स्थिति में नाले में बड़ी मात्रा में कचरा, प्लास्टिक, गाद और निर्माण मलबा जमा है। यदि समय रहते इसकी सफाई नहीं हुई तो तेज बारिश के दौरान पानी का प्रवाह बाधित हो सकता है। इससे आसपास के इलाकों में जलभराव की समस्या पैदा होने की आशंका बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश से पहले नालों की सफाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आती है। कई स्थानों पर नालों में जमा गंदगी अब भी साफ नहीं की गई है, जिससे बारिश के दौरान परेशानी बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहर की जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए प्रमुख नालों की नियमित सफाई और निगरानी जरूरी है। रविंद्र भवन का यह नाला शहर के बड़े हिस्से का बरसाती पानी निकालता है, इसलिए इसकी अनदेखी भारी पड़ सकती है।
अब लोगों की नजर नगर निगम और संबंधित विभागों पर है। नागरिकों का कहना है कि मानसून शुरू होने से पहले नाले की पूरी तरह सफाई कर जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, ताकि बारिश के दौरान शहर को जलभराव जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।