पूर्वोत्तर भारत में मानसून का कहर: असम में बाढ़ से तबाही, 300 मीटर लंबा लोहे का पुल बहा; अरुणाचल में 3 मौतें, सिक्किम में हालात गंभीर
पूर्वोत्तर भारत में मानसून ने भारी तबाही मचा दी है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते असम, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। कई जिलों में बाढ़ और भूस्खलन से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है, जबकि बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
असम में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक बने हुए हैं। राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ के कारण पानी का स्तर तेजी से बढ़ गया है। इसी बीच एक बड़ा हादसा सामने आया है, जहां करीब 300 मीटर लंबा एक लोहे का पुल तेज बहाव में बह गया। यह पुल स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग था, जिसके टूटने से कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है। प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है, लेकिन लगातार बारिश के कारण मुश्किलें बढ़ रही हैं।
अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश के चलते भूस्खलन और सड़क दुर्घटनाओं ने कहर ढाया है। अलग-अलग घटनाओं में अब तक 3 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। पहाड़ी इलाकों में कई सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में भी बाधा आ रही है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
वहीं सिक्किम में भी बारिश का दौर जारी है, जिससे नदियां उफान पर हैं। तेज बहाव के कारण कई जगहों पर नदी किनारे बने छोटे पुल और अस्थायी संरचनाएं बह गई हैं। कुछ इलाकों में मुख्य पुल के क्षतिग्रस्त होने की भी सूचना है, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है। स्थानीय प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया है।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। लगातार बारिश के कारण मिट्टी ढीली हो गई है, जिससे भूस्खलन का खतरा और बढ़ गया है।
प्रशासन ने सेना, एनडीआरएफ और राज्य आपदा मोचन बलों को राहत और बचाव कार्य में लगाया है। प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही, राज्य सरकारों ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
पूर्वोत्तर भारत में प्राकृतिक आपदा का यह सिलसिला लगातार चिंता बढ़ा रहा है। बाढ़ और भूस्खलन ने न सिर्फ जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि बुनियादी ढांचे को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया है। प्रशासन की कोशिशें जारी हैं, लेकिन मौसम की मार राहत कार्यों में बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है।