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मिजोरम में दशकों पुराने उग्रवाद का अंत, अंतिम गुट के आत्मसमर्पण के बाद राज्य पूरी तरह शांत घोषित

 

पूर्वोत्तर भारत के राज्य Mizoram में लंबे समय से चल रहे उग्रवाद के दौर का अब औपचारिक रूप से अंत हो गया है। राज्य में सक्रिय आखिरी उग्रवादी गुट के आत्मसमर्पण के साथ सरकार ने मिजोरम को पूरी तरह शांत और स्थिर राज्य घोषित किया है।

यह घटनाक्रम दशकों से जारी संघर्ष और अस्थिरता के अंत का प्रतीक माना जा रहा है, जिसने राज्य के सामाजिक और राजनीतिक जीवन को लंबे समय तक प्रभावित किया था। अब इस आत्मसमर्पण के बाद मिजोरम को स्थायी शांति की दिशा में एक ऐतिहासिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

संवाद और विकास की नीति बनी आधार

सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह सफलता केवल सुरक्षा बलों की कार्रवाई का परिणाम नहीं है, बल्कि लंबे समय से अपनाई गई “संवाद और विकास” नीति का भी नतीजा है। सरकार ने उग्रवादी समूहों के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया, जिससे कई गुट मुख्यधारा में लौट आए।

इस प्रक्रिया में पुनर्वास, रोजगार और सामाजिक समावेशन जैसी योजनाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अंतिम गुट का आत्मसमर्पण

अंतिम सक्रिय उग्रवादी गुट ने हाल ही में हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। इसके साथ ही राज्य में सशस्त्र संघर्ष की औपचारिक समाप्ति मानी जा रही है। आत्मसमर्पण कार्यक्रम में सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी रही।

विकास की नई राह

शांति की स्थापना के बाद अब राज्य सरकार का ध्यान तेजी से विकास कार्यों पर केंद्रित हो गया है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में सुधार को प्राथमिकता दी जा रही है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि अब राज्य में निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

समाज में राहत और उम्मीद

लंबे संघर्ष के बाद मिजोरम के लोगों में राहत और उम्मीद का माहौल है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि स्थायी शांति से राज्य में सामाजिक एकता और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।