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पानी के संकट ने उजाड़ा किसान का सपना! जालना में किसान ने जेसीबी से उखाड़ दी वर्षों पुरानी मौसंबी की बाग

 

महाराष्ट्र के जालना जिले से किसानों की बदहाली और जल संकट की दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। पानी की लगातार कमी से परेशान एक किसान को अपनी वर्षों की मेहनत से तैयार मौसंबी की पूरी बाग जेसीबी मशीन से उखाड़नी पड़ी। यह घटना अंबड तहसील के वडीलासुरा गांव की है, जिसने सूखे और जल संकट से जूझ रहे किसानों की स्थिति को फिर उजागर कर दिया है।

जानकारी के मुताबिक, किसान ने कई साल पहले बड़ी उम्मीदों के साथ मौसंबी का बाग लगाया था। पेड़ों की देखभाल, सिंचाई और खेती पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे। लेकिन लगातार घटते जलस्तर और बारिश की कमी के कारण बाग को बचाना मुश्किल हो गया। हालात इतने खराब हो गए कि किसान के पास पेड़ों को उखाड़ने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा।

स्थानीय लोगों के अनुसार, इलाके में पिछले कुछ वर्षों से पानी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। कुएं और बोरवेल सूखने लगे हैं, जबकि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा। किसानों का कहना है कि फसलों और बागों को बचाने के लिए उन्हें टैंकरों से महंगा पानी खरीदना पड़ रहा है, जो लंबे समय तक संभव नहीं है।

किसान का दर्द उस समय साफ दिखाई दिया जब जेसीबी मशीन उसकी हरी-भरी मौसंबी की बाग को उखाड़ रही थी। गांव के लोगों का कहना है कि यह केवल एक किसान की कहानी नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों की हालत का प्रतीक है। कई किसान पानी की कमी के कारण बागवानी छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जल संकट का सबसे ज्यादा असर बागवानी फसलों पर पड़ रहा है, क्योंकि इन्हें नियमित सिंचाई की जरूरत होती है। मौसंबी, संतरा और अन्य फलदार पेड़ों को बचाने के लिए पर्याप्त पानी जरूरी होता है। पानी न मिलने पर वर्षों की मेहनत कुछ ही दिनों में बर्बाद हो जाती है।

किसानों ने सरकार से स्थायी जल प्रबंधन योजना और सिंचाई सुविधाएं बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जल संरक्षण और सिंचाई परियोजनाओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

उधर, प्रशासन का कहना है कि प्रभावित इलाकों में जल संकट से निपटने के लिए उपाय किए जा रहे हैं। टैंकरों के जरिए पानी उपलब्ध कराने और जल संरक्षण योजनाओं पर काम करने का दावा किया गया है। हालांकि किसानों का कहना है कि जमीनी स्तर पर अभी भी पर्याप्त राहत नहीं मिल रही।

फिलहाल जालना की यह घटना राज्य में बढ़ते जल संकट और किसानों की मुश्किलों की गंभीर तस्वीर पेश कर रही है। वर्षों की मेहनत से तैयार बाग को अपनी आंखों के सामने उजड़ते देख किसान की बेबसी ने हर किसी को भावुक कर दिया है।