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बीड जिले के विदा गांव में 90 वर्षों से होली पर अनोखी दामाद परंपरा

 

महाराष्ट्र के बीड जिले के विदा गांव में होली के मौके पर 90 वर्षों से चल रही अनोखी परंपरा हर साल लोगों को आकर्षित करती है। इस परंपरा के तहत दामादों को गधे पर बैठाकर जुलूस निकाला जाता है। यह न केवल गांव की पहचान बन गई है, बल्कि हंसी-मजाक के माध्यम से नफरत और विरोध फैलाने वालों को जवाब देने का भी एक प्रतीक बन चुकी है।

गांव वाले बताते हैं कि दामाद इस परंपरा को गौरव और सम्मान के रूप में स्वीकार करते हैं। जुलूस में दामाद मुस्कुराते हुए सभी रस्मों को निभाते हैं और इस अवसर को सामाजिक और पारिवारिक मिलन के रूप में देखते हैं। इसके चलते गांव में खुशियों और हंसी का माहौल बना रहता है।

इस साल परंपरा में बदलाव आया क्योंकि सोने की कीमतें बढ़ गईं। आमतौर पर इस जुलूस में दामाद को सोने की अंगूठी और कपड़े पहनाए जाते थे, लेकिन इस बार उन्हें केवल कपड़े ही दिए गए। गांववालों ने कहा कि सोने की बजाय कपड़े मिलने से भी परंपरा का मूल उद्देश्य और उत्साह कम नहीं हुआ।

विशेषज्ञों और समाजशास्त्रियों का कहना है कि इस तरह की स्थानीय परंपराएं सामाजिक सामंजस्य और गांव की संस्कृति और पहचान को बनाए रखने में मदद करती हैं। विदा गांव की यह परंपरा न केवल दामाद और उनके परिवार के बीच संबंध को मजबूत करती है, बल्कि पूरे गांव के लोगों को साझा हंसी और खुशी का अवसर देती है।

स्थानीय लोग बताते हैं कि यह परंपरा गांव का मान और गौरव बढ़ाती है। इसे देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी लोग आते हैं और जुलूस का हिस्सा बनकर सांस्कृतिक उत्सव का आनंद लेते हैं। बच्चे, बुजुर्ग और युवा सभी इस परंपरा में भाग लेते और हंसी-मजाक में शामिल होते हैं।

गांव के सरपंच ने बताया कि इस परंपरा का संरक्षण और प्रचार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह केवल होली के त्योहार का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह समाजिक एकजुटता और परंपरागत रीति-रिवाजों को भी दर्शाता है।

विदा गांव की यह 90 साल पुरानी परंपरा साबित करती है कि सांस्कृतिक विरासत और हंसी-मजाक के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश फैलाया जा सकता है। दामादों की मुस्कान और गांववालों की हर्षोल्लास भरी भागीदारी इस परंपरा को आज भी जीवंत और लोकप्रिय बनाए रखती है।

इस प्रकार, बीड जिले के विदा गांव में होली के अवसर पर दामादों का गधे पर बैठना न केवल लोकप्रिय और मनोरंजक है, बल्कि यह गांव की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को भी उजागर करता है।