उद्धव ठाकरे ने मराठी भाषा गौरव दिवस पर बीजेपी पर साधा निशाना, कहा – हिंदी सर्वोच्चता की कोशिश
शिवसेना (उबाठा) के प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को बीजेपी पर तीखा हमला बोला। वह ‘मराठी भाषा गौरव दिवस’ के अवसर पर पार्टी के एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर ठाकरे ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) हिंदी भाषा और संस्कृति की सर्वोच्चता स्थापित करना चाहती है।
उद्धव ठाकरे ने कहा, "बीजेपी की नीति क्षेत्रीय भाषाओं, परंपराओं और संस्कृतियों को धीरे-धीरे खत्म करने की है। उनका उद्देश्य केवल हिंदी की सर्वोच्चता स्थापित करना और अन्य भाषाओं का महत्व कम करना है।" उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि महाराष्ट्र जैसी विविध संस्कृति और भाषा संपन्न राज्य में स्थानीय भाषाओं की रक्षा और सम्मान करना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में ठाकरे ने मराठी भाषा और संस्कृति की समृद्धि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मराठी भाषा सिर्फ संचार का माध्यम नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र के इतिहास, परंपराओं और लोक संस्कृति का आधार है। उन्होंने कहा, "मराठी भाषा और हमारी सांस्कृतिक विरासत को कमजोर करने का प्रयास किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है।"
उद्धव ठाकरे ने इस मौके पर सरकारों और राजनीतिक दलों से अपील की कि वे क्षेत्रीय भाषाओं और संस्कृतियों को संविधान और समाज के दृष्टिकोण से सुरक्षित और सम्मानित रखें। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की जनता मराठी भाषा और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए हमेशा सजग रहेगी।
विश्लेषकों का कहना है कि उद्धव ठाकरे का यह बयान राजनीतिक और सांस्कृतिक विवादों की दिशा में एक नया मोड़ जोड़ सकता है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह मुद्दा केवल भाषा का नहीं बल्कि राजनीतिक पहचान, सांस्कृतिक संरक्षण और राज्य की स्वायत्तता से भी जुड़ा है।
मराठी भाषा गौरव दिवस के इस कार्यक्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में मराठी साहित्य, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भाषा की महत्ता और उसके संरक्षण का संदेश दिया गया। ठाकरे ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से जनता में भाषाई और सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ती है।
ठाकरे ने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय भाषाओं और संस्कृतियों को कमजोर करने के किसी भी प्रयास का विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की जनता अपने अधिकार और सांस्कृतिक पहचान के प्रति सचेत रहेगी और इसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।
इस मौके पर उद्धव ठाकरे का जोर मुख्य रूप से राजनीतिक दलों द्वारा भाषा और संस्कृति पर प्रभाव बढ़ाने के प्रयासों पर था। उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि संविधान में निहित भाषा और सांस्कृतिक अधिकारों का सम्मान हो और किसी भी भाषा को हाशिए पर न किया जाए।
कुल मिलाकर, ‘मराठी भाषा गौरव दिवस’ के अवसर पर उद्धव ठाकरे का यह भाषण केवल भाषाई और सांस्कृतिक जागरूकता ही नहीं बढ़ा रहा है, बल्कि यह राजनीतिक विमर्श और राज्य की सांस्कृतिक पहचान के मुद्दों को भी सक्रिय कर रहा है।