रामदास आठवले बोले- नवरात्रि हिंदुओं का त्योहार, गरबा में मुस्लिमों को कभी नहीं रोका; संविधान भाईचारे की बात करता है
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने नवरात्रि और गरबा आयोजनों में मुस्लिम युवक-युवतियों की भागीदारी को लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है, लेकिन गरबा में शामिल होने की इच्छा रखने वाले मुस्लिम युवक-युवतियों को पहले कभी नहीं रोका गया। उन्होंने कहा कि देश का संविधान लोगों के बीच आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देने की बात करता है।
आठवले ने कहा कि भारत विविध धर्मों और संस्कृतियों वाला देश है। यहां अलग-अलग समुदाय अपने-अपने धार्मिक त्योहारों और परंपराओं को मनाते हैं। नवरात्रि भी हिंदू समाज का महत्वपूर्ण पर्व है। इस दौरान देश के कई हिस्सों में गरबा और डांडिया के आयोजन होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग हिस्सा लेते हैं।
गरबा आयोजनों में दूसरे समुदायों की भागीदारी को लेकर पूछे गए सवाल पर रामदास आठवले ने कहा कि यदि कोई मुस्लिम युवक या युवती गरबा में शामिल होना चाहता है तो उसे पहले कभी रोका नहीं गया। उनके मुताबिक धार्मिक आयोजनों में लोगों की भागीदारी को लेकर समाज में आपसी समझ और भाईचारे की भावना बनी रहनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश का संविधान नागरिकों के बीच आपसी प्रेम और भाईचारा बढ़ाने की बात करता है। उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग धर्मों के लोग रहते हैं और सभी को एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं तथा परंपराओं का सम्मान करना चाहिए।
नवरात्रि के दौरान गरबा आयोजनों में प्रवेश को लेकर कई स्थानों पर पहचान और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े नियम बनाए जाते हैं। आयोजक सुरक्षा व्यवस्था और आयोजन की प्रकृति को देखते हुए अपने स्तर पर नियम तय करते हैं। ऐसे में गरबा कार्यक्रमों में कौन शामिल हो सकता है, इसे लेकर अलग-अलग स्थानों पर अलग व्यवस्थाएं देखने को मिलती हैं।
रामदास आठवले के बयान में धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक सद्भाव का मुद्दा प्रमुख रहा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अलग-अलग समुदायों के बीच आपसी सम्मान और भाईचारा कायम रहना चाहिए। उनका कहना है कि धार्मिक त्योहारों के दौरान सामाजिक सौहार्द की भावना को भी मजबूत किया जाना जरूरी है।
नवरात्रि और गरबा को लेकर हर साल देश के कई शहरों में बड़े आयोजन होते हैं। इन कार्यक्रमों में पारंपरिक वेशभूषा, संगीत और नृत्य के साथ लोग उत्सव में हिस्सा लेते हैं। ऐसे आयोजनों को लेकर सुरक्षा, प्रवेश और पहचान से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में रहते हैं। आठवले का ताजा बयान इसी व्यापक चर्चा के बीच सामने आया है।