☰
×

SIR पर याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार पर सवाल, 14 फैसले रद्द करने और महाराष्ट्र में प्रक्रिया रोकने की मांग

 

महाराष्ट्र में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR की प्रक्रिया को लेकर विवाद के बीच एक याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने 2023 के कानून की धारा 18 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। याचिका में चुनाव आयोग से जुड़े 14 फैसलों को रद्द करने और महाराष्ट्र में चल रही SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई है।

दरअसल, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर हाल में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति दर्ज की थी। ये आपत्तियां मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म-6 में बदलाव तथा मतदाता सूची से जुड़े डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दों से संबंधित थीं।याचिकाकर्ता का तर्क है कि 2023 के Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act की धारा 18 में आयोग के कामकाज को लेकर सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का प्रावधान है। कानून के अनुसार आयोग का काम जहां तक संभव हो, सर्वसम्मति से किया जाना चाहिए। यदि सदस्यों के बीच मतभेद हो तो निर्णय बहुमत की राय के आधार पर लिया जाता है।

इसी प्रावधान का हवाला देते हुए याचिका में आरोप लगाया गया है कि जिन 14 फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज की गईं, उनमें प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। याचिकाकर्ता ने इन फैसलों को रद्द करने की मांग के साथ महाराष्ट्र में SIR की प्रक्रिया को रोकने का अनुरोध किया है।हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों के बीच अपना पक्ष भी स्पष्ट किया है। 23 सितंबर को आयोग ने कहा कि SIR समेत उसके हालिया फैसले पूर्ण आयोग यानी Full Commission द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग के मुताबिक, सदस्यों के बीच विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग सवाल या टिप्पणियां सामने आना संस्थागत प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है।

विवाद का एक प्रमुख पहलू यह भी है कि सामने आई रिपोर्ट में दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से मतदाता सूची से जुड़े कई फैसलों और प्रक्रियाओं पर सवाल उठाने की बात कही गई है। दूसरी ओर आयोग का कहना है कि अंतिम फैसले सामूहिक और सर्वसम्मत थे। ऐसे में अब अदालत के सामने याचिका में लगाए गए आरोपों और संबंधित कानूनी प्रावधानों की व्याख्या महत्वपूर्ण होगी।

महाराष्ट्र में SIR मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ी प्रक्रिया है। याचिका में इस प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग किए जाने के बाद मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, SIR को लेकर अंतिम स्थिति अदालत में होने वाली सुनवाई और उसके आदेश पर निर्भर करेगी।फिलहाल याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका, आयोग की निर्णय प्रक्रिया और 14 फैसलों को लेकर उठे सवालों की न्यायिक समीक्षा की मांग की गई है। वहीं चुनाव आयोग अपने फैसलों को सामूहिक और सर्वसम्मत प्रक्रिया का परिणाम बता चुका है।