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‘ओपन मेरिट’ पर NCP (SP) का बड़ा बयान, कहा- मेरिट से चयनित आरक्षित वर्ग के छात्रों को मिले सामान्य श्रेणी का लाभ

 

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) ने महाराष्ट्र में ‘ओपन मेरिट’ व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। पार्टी ने कहा है कि आरक्षित श्रेणी के जो छात्र अपनी योग्यता और अंकों के आधार पर सामान्य मेरिट सूची में चयनित होते हैं, उन्हें ‘ओपन श्रेणी’ के तहत ही नौकरी और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश दिया जाना चाहिए।

पार्टी का कहना है कि यदि कोई छात्र आरक्षण का लाभ लिए बिना अपनी मेहनत और प्रदर्शन के दम पर सामान्य श्रेणी की मेरिट में जगह बनाता है, तो उसे उसी श्रेणी में माना जाना चाहिए। इससे आरक्षित वर्ग के अन्य जरूरतमंद उम्मीदवारों को भी अवसर मिल सकेगा।

एनसीपी (SP) नेताओं ने कहा कि ‘ओपन मेरिट’ का मूल उद्देश्य यही है कि जो उम्मीदवार सामान्य कटऑफ के आधार पर चयनित हो रहे हैं, उन्हें आरक्षित सीटों में नहीं गिना जाए। इससे आरक्षण व्यवस्था का सही तरीके से पालन होगा और अधिक से अधिक छात्रों को लाभ मिल पाएगा।

पार्टी ने महाराष्ट्र सरकार से इस व्यवस्था को स्पष्ट और पारदर्शी तरीके से लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि कई बार भर्ती और प्रवेश प्रक्रियाओं में भ्रम की स्थिति बन जाती है, जिससे छात्रों के बीच असंतोष पैदा होता है। इसलिए सरकार को इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, महाराष्ट्र में ‘ओपन मेरिट’ और आरक्षण व्यवस्था को लेकर लंबे समय से बहस चलती रही है। विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों की ओर से भी समय-समय पर इस मुद्दे को उठाया जाता रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई आरक्षित वर्ग का छात्र सामान्य श्रेणी की कटऑफ पार कर लेता है, तो उसे ‘ओपन’ सीट पर समायोजित करना आरक्षण के उद्देश्य के अनुरूप माना जाता है। इससे आरक्षित सीटें उन उम्मीदवारों के लिए बचती हैं जिन्हें वास्तव में आरक्षण की आवश्यकता है।

हालांकि इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की राय भी अलग हो सकती है। कुछ लोग इसे सामाजिक न्याय के नजरिए से देखते हैं, जबकि कुछ इसे पूरी तरह मेरिट आधारित व्यवस्था का हिस्सा मानते हैं।

फिलहाल एनसीपी (SP) के इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ओपन मेरिट’ का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस विषय पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस और तेज हो सकती है।