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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग वाले छात्र आंदोलन पर मोहन भागवत का बड़ा बयान, बोले- प्रदर्शनकारी बच्चे देश विरोधी नहीं

 

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने छात्र आंदोलनों और युवा पीढ़ी को लेकर संघ, भाजपा और सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करने वाले छात्रों को देश विरोधी मानना सही नहीं है। भागवत ने युवाओं के विरोध और उनकी चिंताओं को समझने की जरूरत पर जोर देते हुए जेन जी और अल्फा पीढ़ी को ईमानदार बताया।

मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्र आंदोलन चर्चा में रहा है। आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में छात्रों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई। इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।

प्रदर्शनकारी छात्रों को देश विरोधी कहना गलत

मोहन भागवत ने साफ कहा कि किसी मुद्दे को लेकर सड़कों पर उतरने वाले छात्रों को केवल विरोध करने के कारण देश विरोधी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने युवा पीढ़ी के नजरिए को समझने और उनकी बात सुनने की आवश्यकता बताई। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में असहमति और सवाल उठाने की अपनी अहम भूमिका है।

भागवत के इस संदेश को सरकार और भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि युवाओं के असंतोष को केवल विरोध या राजनीतिक गतिविधि के तौर पर देखने के बजाय उसके पीछे मौजूद कारणों को समझना चाहिए।

जेन जी और अल्फा पीढ़ी को बताया ईमानदार

आरएसएस प्रमुख ने जेन जी और अल्फा पीढ़ी को लेकर भी सकारात्मक टिप्पणी की। उन्होंने इन पीढ़ियों को ईमानदार बताया और कहा कि युवा अपने सवालों और विचारों को लेकर खुलकर सामने आते हैं। वे व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछने से पीछे नहीं हटते।

भागवत के मुताबिक, युवाओं की यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। नई पीढ़ी को केवल अनुशासन या आज्ञापालन के नजरिए से देखने के बजाय उनकी सोच और अपेक्षाओं को समझना जरूरी है।

संघ और सरकार के लिए संदेश

मोहन भागवत के बयान को संघ और सरकार के बीच युवा मुद्दों को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि छात्र आंदोलनों को देश विरोधी गतिविधियों से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।

दरअसल, मौजूदा दौर में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के कारण युवा किसी भी मुद्दे पर तेजी से संगठित होकर अपनी आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में सरकार और राजनीतिक संगठनों के सामने युवाओं की शिकायतों और मांगों को गंभीरता से सुनने की चुनौती भी बढ़ी है।

भागवत का बयान इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने जेन जी और अल्फा पीढ़ी को ईमानदार बताकर यह संदेश देने की कोशिश की कि युवाओं के सवालों को दबाने के बजाय उनसे संवाद किया जाना चाहिए। उनके इस रुख से छात्र आंदोलनों और युवा राजनीति को लेकर नई बहस छिड़ सकती है।