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महाराष्ट्र गरबा विवाद: मुस्लिमों की एंट्री पर घमासान, नितेश राणे और अमृता फडणवीस आमने-सामने

 

महाराष्ट्र में नवरात्रि से पहले गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिमों की एंट्री को लेकर विवाद बढ़ गया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) की ओर से गरबा कार्यक्रमों में मुस्लिमों की भागीदारी को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और बीजेपी नेता नितेश राणे ने VHP के रुख का समर्थन किया है, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने कहा है कि अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति शांतिपूर्ण तरीके से गरबा में शामिल होता है तो इसमें कुछ गलत नहीं है।

VHP ने की पहचान जांच की मांग

विवाद की शुरुआत तब हुई जब VHP ने महाराष्ट्र में गरबा और डांडिया आयोजनों में शामिल होने वाले लोगों की पहचान जांचने की मांग उठाई। संगठन ने आयोजकों से प्रतिभागियों की पहचान सुनिश्चित करने और कुछ जगहों पर प्रवेश को लेकर सख्ती बरतने की अपील की।

VHP के इस रुख के बाद बीजेपी नेता नितेश राणे ने भी इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि हिंदू धार्मिक आयोजनों की पवित्रता बनाए रखना जरूरी है। राणे ने इस मुद्दे को कथित ‘लव जिहाद’ से जोड़ते हुए आयोजनों में आने वालों की पहचान स्पष्ट करने की बात कही।

अमृता फडणवीस ने जताई अलग राय

वहीं, अमृता फडणवीस ने इस मुद्दे पर अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि त्योहार लोगों को जोड़ने का माध्यम होते हैं और अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति गरबा में आता है, शांतिपूर्वक कार्यक्रम में शामिल होता है और उत्सव का आनंद लेता है तो इसमें उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

उन्होंने धर्म के आधार पर किसी व्यक्ति को रोकने के विचार पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहचान की जांच सुरक्षा कारणों से हो सकती है, लेकिन किसी की धार्मिक पहचान के आधार पर भेदभाव उचित नहीं है।

बयान के बाद सियासत तेज

नितेश राणे और अमृता फडणवीस के अलग-अलग रुख के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने भी अमृता फडणवीस के बयान का समर्थन करते हुए इसे सामाजिक सौहार्द से जुड़ा मुद्दा बताया है।

वहीं, समर्थकों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों की परंपरा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आयोजकों को नियम बनाने का अधिकार होना चाहिए।

नवरात्रि से पहले गरबा पर बढ़ी नजर

महाराष्ट्र में नवरात्रि के दौरान बड़े स्तर पर गरबा और डांडिया कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मुंबई समेत कई शहरों में हजारों लोग इन आयोजनों में हिस्सा लेते हैं। ऐसे में इस बार गरबा आयोजनों में सुरक्षा, पहचान और भागीदारी को लेकर प्रशासन और आयोजकों पर भी नजर रहेगी।

फिलहाल मुस्लिमों की गरबा में एंट्री का मुद्दा सामाजिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। एक ओर जहां कुछ संगठन धार्मिक पहचान और परंपरा का हवाला दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग त्योहारों को सभी समुदायों की भागीदारी वाला मंच मान रहे हैं।