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आईआईटी बॉम्बे ने छात्र साहिल की मौत पर मांगी माफी, छात्रों ने डायरेक्टर के इस्तीफे की मांग उठाई

 

आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद विवाद बढ़ता जा रहा है। संस्थान ने छात्र की मौत से जुड़े अपने पहले के बयानों को लेकर माफी मांगी है। आईआईटी बॉम्बे ने कहा कि घटना से जुड़े तथ्य अभी जांच के दायरे में हैं और जांच पूरी होने से पहले परिस्थितियों को लेकर किसी तरह का निष्कर्ष या विवरण देना उचित नहीं था।

दरअसल, साहिल वाकोडे की मौत के बाद आईआईटी बॉम्बे की ओर से पहले कहा गया था कि परीक्षा के दौरान कथित तौर पर मोबाइल फोन और ChatGPT के इस्तेमाल से जुड़ी घटना सामने आई थी। इसके बाद छात्रों और साहिल के परिवार की ओर से संस्थान के रवैये पर सवाल उठाए गए। परिवार ने संस्थान में उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव के आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों की जांच चल रही है।

छात्रों ने शुरू किया था विरोध प्रदर्शन

साहिल की मौत के बाद आईआईटी बॉम्बे परिसर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने मामले की स्वतंत्र जांच, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और छात्र कल्याण व्यवस्था में बदलाव समेत कई मांगें प्रशासन के सामने रखीं। छात्रों ने कुल 18 मांगों का चार्टर तैयार किया था।

21 सितंबर को सामने आई जानकारी के मुताबिक, संस्थान के डायरेक्टर प्रोफेसर शिरीष केदारे ने छात्रों के साथ करीब तीन घंटे की बैठक के बाद 18 सूत्रीय मांग-पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं था कि सभी मांगों को तत्काल लागू कर दिया गया है। प्रशासन ने कई मामलों में तय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की बात कही थी।

डायरेक्टर के इस्तीफे की भी मांग

छात्रों की प्रमुख मांगों में आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर के इस्तीफे से जुड़ी मांग भी शामिल है। चार्टर के मुताबिक, छात्रों ने कहा है कि यदि निर्धारित मांगों को एक महीने के भीतर लागू नहीं किया जाता है तो डायरेक्टर समेत कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को इस्तीफा देना चाहिए। छात्रों ने मांगों की प्रगति की नियमित जानकारी देने की भी मांग की है।

हालांकि, आईआईटी बॉम्बे ने स्पष्ट किया है कि डायरेक्टर शिरीष केदारे ने इस्तीफा नहीं दिया है। संस्थान ने इस्तीफे से जुड़ी खबरों को गलत बताया है।

प्रोफेसर के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग

छात्रों ने परीक्षा से जुड़े प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है। दुल्ला उस परीक्षा में निरीक्षक थे, जिसमें साहिल के खिलाफ कथित नकल का मामला सामने आया था। संस्थान ने उन्हें डीन के प्रशासनिक पद से हटा दिया है, जबकि छात्रों की मांग है कि जांच पूरी होने तक उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाए।

मामले की जांच के बीच आईआईटी बॉम्बे की ओर से माफी मांगे जाने और छात्रों की मांगों पर चर्चा के बावजूद परिसर में उठे सवाल पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। फिलहाल पुलिस जांच और संस्थान की आंतरिक प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ ही साहिल की मौत से जुड़े घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।