यूपी की सियासत में गरमाहट: सपा में टूट के दावे, वीडियो में देंखे राजभर के बयान से मचा राजनीतिक तूफान
उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर तीखी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के दौर में पहुंच गई है। महाराष्ट्र की राजनीति में संभावित टूट की चर्चाओं के बीच अब यूपी में भी समाजवादी पार्टी को लेकर बड़े राजनीतिक दावे किए जा रहे हैं।यूपी के कैबिनेट मंत्री Om Prakash Rajbhar ने बुधवार को दावा किया कि समाजवादी पार्टी में भी जल्द ही बड़ी टूट देखने को मिल सकती है। उन्होंने कहा कि अब महाराष्ट्र की तरह यूपी की राजनीति पर भी सबकी नजर है और यहां भी राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल सकते हैं।
राजभर ने आरोप लगाते हुए कहा कि सपा नेता Ram Gopal Yadav ने केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah को एक चिट्ठी भेजी है, जिसमें कई नामों का उल्लेख होने की बात कही जा रही है। उन्होंने दावा किया कि इस चिट्ठी का उद्देश्य राजनीतिक स्तर पर संपर्क और समीकरणों को लेकर संकेत देना है। हालांकि, इस चिट्ठी की आधिकारिक सामग्री सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।राजभर ने यह भी कहा कि अगर उनके दावे गलत हैं तो राम गोपाल यादव को स्पष्ट करना चाहिए कि उस पत्र में क्या लिखा गया था। उन्होंने सपा नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता को सच्चाई जानने का अधिकार है और स्थिति को छिपाया नहीं जाना चाहिए।
इसी बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी ओम प्रकाश राजभर ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने सपा नेतृत्व पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर खनन घोटाले और गोमती रिवर फ्रंट से जुड़े मामलों की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए, तो बड़ा राजनीतिक भूचाल आ सकता है। उन्होंने सपा पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगाए।इस बीच कानपुर में उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya ने भी सपा को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का राजनीतिक भविष्य संकट में है और आने वाले समय में पार्टी को बड़ा झटका लग सकता है। उन्होंने दावा किया कि सपा के 25 से 26 सांसद पार्टी छोड़ सकते हैं, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा तोड़फोड़ की राजनीति में विश्वास नहीं रखती।
इन बयानों के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में गर्माहट बढ़ गई है और सत्ता व विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। समाजवादी पार्टी की ओर से फिलहाल इन दावों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयानबाजी आने वाले चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकती है, लेकिन वास्तविक राजनीतिक बदलाव तभी स्पष्ट होंगे जब कोई ठोस घटनाक्रम सामने आएगा। फिलहाल यह मुद्दा यूपी की सियासत में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।