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शिवसेना नेता का दावा- एकनाथ शिंदे नहीं होते तो महाराष्ट्र में बीजेपी खत्म हो गई होती, बोले- उन्होंने पार्टी को फिर खड़ा किया

 

महाराष्ट्र की सियासत में बीजेपी और शिवसेना के बीच बयानबाजी का दौर जारी है। इसी बीच शिवसेना के एमएलसी चंद्रकांत रघुवंशी ने एकनाथ शिंदे को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि अगर एकनाथ शिंदे ने राजनीतिक रूप से कदम नहीं उठाया होता तो महाराष्ट्र में बीजेपी का अस्तित्व संकट में पड़ सकता था। रघुवंशी ने दावा किया कि शिंदे के प्रयासों की वजह से ही बीजेपी दोबारा सत्ता में आने की स्थिति में पहुंची।

चंद्रकांत रघुवंशी ने कहा कि एकनाथ शिंदे ने बीजेपी को फिर से खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई। उनके मुताबिक, महाविकास अघाड़ी सरकार के दौर में बीजेपी सत्ता से बाहर थी और उस समय शिंदे के राजनीतिक कदम के बाद महाराष्ट्र की सत्ता का समीकरण बदला। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि अगर शिंदे आगे नहीं आते तो बीजेपी के लिए खुद को बचाना मुश्किल हो जाता।

शिंदे को सत्ता में वापसी का श्रेय

रघुवंशी ने अपने बयान में महाराष्ट्र की पिछली राजनीतिक परिस्थितियों का जिक्र किया। उनका कहना था कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के एक धड़े के अलग होने के बाद राज्य में सत्ता का समीकरण बदला और बीजेपी सत्ता में वापस आई। उन्होंने इसी घटनाक्रम को बीजेपी के राजनीतिक पुनरुत्थान से जोड़ते हुए शिंदे को इसका श्रेय दिया।

बीजेपी की ओर से प्रतिक्रिया नहीं

रघुवंशी के इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि बीजेपी और एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना फिलहाल सत्ता में सहयोगी हैं। ऐसे में एक सहयोगी दल के नेता की ओर से बीजेपी के राजनीतिक अस्तित्व को लेकर दिया गया यह बयान दोनों दलों के बीच संबंधों को लेकर सवाल खड़े करता है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इस बयान पर बीजेपी की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

विजयकुमार गावित को लेकर भी दिया बयान

चंद्रकांत रघुवंशी ने बीजेपी नेता विजयकुमार गावित का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि एकनाथ शिंदे की वजह से ही गावित को मंत्री पद मिला था। रघुवंशी ने शिंदे को मुख्यमंत्री बनाए जाने के फैसले का भी समर्थन किया और कहा कि वह इस पद के योग्य थे। उन्होंने आगे भी शिंदे को मुख्यमंत्री पद के लिए उपयुक्त बताया।

महाराष्ट्र में गठबंधन के बीच बयानबाजी

यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना के बीच स्थानीय स्तर पर राजनीतिक खींचतान और नेतृत्व को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। दोनों दल राज्य में सत्ता के गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन अलग-अलग नेताओं के बयानों के चलते समय-समय पर मतभेद सामने आते रहे हैं। रघुवंशी का ताजा बयान भी इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। हालांकि, बीजेपी की ओर से इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद ही दोनों दलों के रुख को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।