पुणे में विप्रो की पूर्व कर्मचारी का गंभीर आरोप, वीडियो में कहा- धर्म परिवर्तन का बनाया गया दबाव, विरोध पर नौकरी छोड़ने को मजबूर किया
पुणे में एक पूर्व महिला कर्मचारी ने आईटी कंपनी विप्रो टेक्नोलॉजीज पर कार्यस्थल पर धार्मिक उत्पीड़न, भेदभाव और अप्रत्यक्ष रूप से इस्तीफा देने के लिए मजबूर करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला ने यह आरोप हिंदू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सार्वजनिक रूप से लगाए।
महिला ने सुनाई आपबीती
पूर्व कर्मचारी ने बताया कि वह पुणे के हिंजवडी स्थित कार्यालय में कार्यरत थी। उसके अनुसार, नौकरी के दौरान उसे एक महिला सहकर्मी की ओर से लगातार मानसिक दबाव और धार्मिक टिप्पणी का सामना करना पड़ा। महिला का आरोप है कि सहकर्मी बार-बार उसे इस्लाम धर्म अपनाने और एक मुस्लिम पुरुष के साथ संबंध बनाने के लिए कहती थी।
पीड़िता के मुताबिक, सहकर्मी उसकी निजी जिंदगी में दखल देती थी और अक्सर कहती थी कि हिंदू धर्म छोड़ने से उसकी जिंदगी बेहतर हो जाएगी। महिला का दावा है कि उसे यह भी कहा जाता था कि धर्म परिवर्तन करने पर विदेश जाने और करियर में आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
कार्यस्थल पर भेदभाव का भी आरोप
महिला ने आरोप लगाया कि उसने इस तरह की टिप्पणियों और दबाव का विरोध किया, लेकिन उसे अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। उसका कहना है कि शिकायतों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ और लगातार बढ़ते मानसिक तनाव के कारण उसे अंततः नौकरी छोड़नी पड़ी।
पूर्व कर्मचारी ने कंपनी पर कार्यस्थल पर भेदभाव और शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाया गया मामला
यह मामला हिंदू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में सामने आया, जहां महिला ने अपने अनुभव साझा किए। समिति ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कार्यस्थलों पर कर्मचारियों की धार्मिक स्वतंत्रता की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
कंपनी की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस मामले में विप्रो टेक्नोलॉजीज की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कंपनी का पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
मामले ने कार्यस्थलों पर धार्मिक स्वतंत्रता, व्यक्तिगत अधिकारों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह कॉर्पोरेट कार्यसंस्कृति और कर्मचारी संरक्षण से जुड़ा गंभीर मामला माना जाएगा।