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महाराष्ट्र में प्याज के दाम गिरने से भड़के किसान, सड़क पर उतरे; MSP जैसी खरीद पर भी नहीं बनी बात

 

महाराष्ट्र में प्याज की गिरती कीमतों को लेकर किसानों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्य के नासिक, छत्रपति संभाजीनगर समेत कई जिलों में किसानों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों का कहना है कि बाजार में प्याज के दाम इतनी तेजी से गिर गए हैं कि लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।

दरअसल, केंद्र सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए रबी प्याज की खरीद हेतु 1,580 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम सुनिश्चित खरीद मूल्य घोषित किया है। हालांकि किसानों ने इस कीमत को नाकाफी बताते हुए इसे मानने से इनकार कर दिया है। प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि खेती, मजदूरी, खाद, बीज और परिवहन की बढ़ती लागत के मुकाबले यह कीमत बहुत कम है।

नासिक, जिसे देश की सबसे बड़ी प्याज मंडियों में गिना जाता है, वहां किसानों का आक्रोश सबसे ज्यादा देखने को मिला। कई जगह किसानों ने सड़कों पर प्याज फेंककर विरोध जताया। किसानों का कहना है कि बाजार में कई बार प्याज के दाम इतने नीचे चले जाते हैं कि फसल बेचने के बाद भी उन्हें घाटा उठाना पड़ता है।

प्रदर्शन कर रहे किसानों का आरोप है कि सरकार समय रहते बाजार में हस्तक्षेप नहीं करती, जिसके कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। उनका कहना है कि जब खुदरा बाजार में प्याज महंगी बिकती है तो किसानों को उसका फायदा नहीं मिलता, लेकिन दाम गिरने पर सबसे ज्यादा मार किसानों पर ही पड़ती है।

किसान संगठनों ने मांग की है कि प्याज के लिए स्थायी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) जैसी व्यवस्था लागू की जाए और सरकार बड़े स्तर पर खरीद सुनिश्चित करे। कई किसानों का कहना है कि 1,580 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत उनकी लागत से भी कम पड़ रही है। ऐसे में उन्हें मजबूरी में घाटे में फसल बेचनी पड़ रही है।

उधर, सरकार का कहना है कि किसानों को राहत देने के लिए खरीद प्रक्रिया शुरू की जा रही है और बाजार स्थिर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, सरकारी एजेंसियों के जरिए प्याज खरीदकर किसानों को कुछ राहत देने की कोशिश की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि हर साल उत्पादन बढ़ने और मांग-आपूर्ति में असंतुलन के कारण प्याज की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ता है। कई बार अच्छी पैदावार भी किसानों के लिए नुकसान का कारण बन जाती है।

फिलहाल महाराष्ट्र के कई जिलों में किसानों का आंदोलन जारी है। सड़क जाम और विरोध प्रदर्शन के चलते कुछ जगहों पर यातायात भी प्रभावित हुआ। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

प्याज की गिरती कीमतों ने एक बार फिर किसानों की आर्थिक स्थिति और कृषि बाजार व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर सरकार और किसान संगठनों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी है।