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उद्धव-राज ठाकरे के मार्च पर फडणवीस का तंज, बोले- 'गजनी' जैसे हो गए हैं; SIR और CEC पर घमासान

 

महाराष्ट्र की राजनीति में चुनाव आयोग और मतदाता सूची के मुद्दे को लेकर घमासान बढ़ता जा रहा है। रविवार को शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे के नेतृत्व में मुंबई में विरोध मार्च निकाला गया। मार्च में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और एसआईआर यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए। कांग्रेस और एनसीपी शरद पवार गुट के नेता भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए।

मार्च दक्षिण मुंबई में मेट्रो सिनेमा से शुरू होकर बीएमसी मुख्यालय तक पहुंचा। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे लंबे समय बाद एक ही मंच पर नजर आए, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में इस प्रदर्शन को खासा महत्व मिला।

इस मार्च के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव और राज ठाकरे पर निशाना साधा। उन्होंने दोनों नेताओं को लेकर 'गजनी' शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि उन्हें घटनाओं का क्रम याद रखना चाहिए। फडणवीस ने सवाल उठाया कि जब ज्ञानेश कुमार 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त बने और एसआईआर की प्रक्रिया 2026 में शुरू हुई, तो इन्हें 2024 में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से कैसे जोड़ा जा सकता है।

फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव 2024 में हुए थे, जबकि ज्ञानेश कुमार ने फरवरी 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभाला। इसी आधार पर उन्होंने विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाया। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष चुनाव में मिली हार की निराशा चुनाव आयोग पर निकाल रहा है।

मुख्यमंत्री ने प्रदर्शन को लेकर यह भी दावा किया कि मार्च का उद्देश्य राजनीतिक रूप से खोई जमीन वापस पाने की कोशिश था और अपेक्षा के मुकाबले इसमें कम लोग शामिल हुए। यह फडणवीस का राजनीतिक आकलन है, जबकि विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग को लेकर अपनी आपत्तियां दोहराई हैं।

वहीं प्रदर्शन में शामिल विपक्षी नेताओं की ओर से चुनाव आयोग पर मतदाता सूची और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव से बड़ी संख्या में मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करता रहा है और एसआईआर को मतदाता सूची की जांच और संशोधन की प्रक्रिया बताता है।

इस बीच मुंबई पुलिस ने मार्च के आयोजकों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। हालांकि, मार्च में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और विपक्षी नेताओं ने इसे चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी राजनीतिक और लोकतांत्रिक आपत्तियां दर्ज कराने का माध्यम बताया।

उद्धव और राज ठाकरे के एक मंच पर आने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में इस प्रदर्शन को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री फडणवीस इन आरोपों के जवाब में चुनाव की तारीखों और ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल का हवाला दे रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में बहस का प्रमुख विषय बना रह सकता है।