उद्धव-राज ठाकरे के SIR विरोधी मार्च पर फडणवीस का तंज, उद्धव को ‘गजनी’ बताया
मुंबई में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के नेतृत्व में मार्च निकाला गया। इस मार्च में दोनों नेताओं के समर्थक और कार्यकर्ता शामिल हुए। मार्च के जरिए SIR की प्रक्रिया को लेकर विरोध जताया गया और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए गए।
इस प्रदर्शन को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा। उन्होंने तंज कसते हुए उद्धव ठाकरे की तुलना फिल्म ‘गजनी’ के किरदार से की। फडणवीस की टिप्पणी के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
SIR के खिलाफ सड़क पर उतरे ठाकरे बंधु
मुंबई में निकाले गए मार्च में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक साथ नजर आए। दोनों नेताओं ने SIR को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। उनका कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर लोगों के बीच कई तरह की चिंताएं हैं।
मार्च के दौरान कार्यकर्ताओं ने SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शन के जरिए चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश की गई।
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक मंच पर आना भी महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का विषय बना। दोनों नेता लंबे समय बाद एक साथ किसी बड़े सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रम में नजर आए।
फडणवीस ने उद्धव ठाकरे पर कसा तंज
मार्च को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा। उन्होंने उन्हें ‘गजनी’ कहकर तंज किया। यह संदर्भ आम तौर पर ऐसी स्थिति के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें किसी व्यक्ति पर पहले कही या की गई बात को भूलने का आरोप लगाया जाता है।
फडणवीस की इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी है। हालांकि, उनके बयान के जवाब में उद्धव ठाकरे या उनके गुट की ओर से क्या प्रतिक्रिया दी जाती है, इस पर भी नजर बनी हुई है।
ठाकरे बंधुओं के साथ आने से बढ़ी चर्चा
उद्धव और राज ठाकरे का एक साथ आना इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण राजनीतिक पहलू माना जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से राजनीतिक दूरी रही है। ऐसे में SIR के मुद्दे पर संयुक्त रूप से मार्च में शामिल होने से महाराष्ट्र की राजनीति में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज हुई है।
मार्च में SIR के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी विरोध जताया गया। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े सवाल उठाए।
SIR को लेकर जारी है राजनीतिक बहस
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों की राय अलग है। विपक्षी दल इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को अपडेट और सत्यापित करने की प्रक्रिया के रूप में इसे देखा जाता है।
मुंबई में ठाकरे बंधुओं के नेतृत्व में हुए मार्च और इसके बाद फडणवीस की टिप्पणी ने इस मुद्दे पर महाराष्ट्र की राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। अब आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की ओर से इस मुद्दे पर और बयान सामने आने की संभावना है।