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ED की जांच में खुलासा: LTTE को फिर से सक्रिय करने की साजिश, चेन्नई के कारोबारी के. बास्करण पर संदेह

 

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में यह दावा सामने आया है कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन LTTE (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) को दोबारा सक्रिय करने की साजिश रची जा रही थी। जांच एजेंसी ने इस साजिश में चेन्नई के कारोबारी के. बास्करण (K. Baskaran) की भूमिका को बेहद अहम बताया है।

ED का दावा और वित्तीय प्रवाह
एजेंसी के अनुसार, बास्करण की कंपनी के खातों में विदेश, विशेषकर डेनमार्क स्थित LTTE नेटवर्क से लगभग 1.66 करोड़ रुपये भेजे गए। ED ने कहा कि यह धनराशि सीधे या परोक्ष रूप से LTTE के पुन: सक्रिय होने और उनके नेटवर्क को मजबूत करने में इस्तेमाल होने की संभावना थी।

ED अधिकारी ने कहा, “हमारे प्रारंभिक निष्कर्षों के अनुसार, यह रकम किसी भी व्यवसायिक लेन-देन के बजाय आतंकवादी गतिविधियों के लिए भेजी गई लगती है। हम मामले की गहन जांच कर रहे हैं।”

के. बास्करण की भूमिका
के. बास्करण चेन्नई के एक प्रतिष्ठित कारोबारी के रूप में जाने जाते हैं। ED ने बताया कि उनकी कंपनी का ढांचा और विदेशी खातों के लेन-देन संगठित तरीके से LTTE नेटवर्क से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। जांच के दौरान बास्करण से पूछताछ की गई है और उनके बैंक खातों की समीक्षा भी की जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के मामले राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी प्रयासों के दृष्टिकोण से अत्यंत गंभीर होते हैं। विदेशी नेटवर्क से धन का प्रवाह, खासकर प्रतिबंधित संगठनों को, देश के कानून के तहत गंभीर अपराध माना जाता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव
LTTE का नाम भारत और कई देशों में प्रतिबंधित आतंकी संगठन के रूप में दर्ज है। इस संगठन ने श्रीलंका में लंबे समय तक हिंसक गतिविधियों को अंजाम दिया था और भारत में भी इसके कई समर्थक नेटवर्क पाए गए थे। ED के अनुसार, यदि LTTE को पुनः सक्रिय किया गया होता तो यह क्षेत्रीय और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता था।

आगे की कार्रवाई
ED ने मामले में आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन, बैंकिंग रिकॉर्ड और विदेशी सहयोगियों की पहचान की जाएगी। साथ ही, संगठन के संभावित स्थानीय समर्थकों और नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।

राजनीतिक और सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला दिखाता है कि आतंकवादी संगठन अपनी गतिविधियों को छुपे हुए और अंतरराष्ट्रीय माध्यमों से संचालित करने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे मामलों में नागरिक जागरूकता और कड़ी निगरानी अत्यंत आवश्यक है।