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सूखे ने तोड़ी किसान की उम्मीद, 3 एकड़ पपीते की फसल पर चला दिया रोटावेटर

 

महाराष्ट्र के धुले जिले में सूखे और पानी की कमी की गंभीर स्थिति ने एक किसान को अपनी खड़ी फसल नष्ट करने के लिए मजबूर कर दिया। चिंचवार गांव में किसान इस्मोद्दीन पटेल ने करीब तीन एकड़ में लगी पपीते की फसल पर रोटावेटर चला दिया। किसान के मुताबिक, फसल तैयार करने में करीब साढ़े तीन लाख रुपये खर्च हुए, लेकिन पानी की कमी के कारण पौधों पर फल नहीं आ सके।

तीन एकड़ में लगाई थी पपीते की फसल

किसान ने करीब तीन एकड़ जमीन में पपीते की बागवानी की थी। इसके लिए उन्होंने अपनी जमा पूंजी से लगभग 3 से 3.5 लाख रुपये खर्च किए। पौधे तैयार होने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि अच्छी पैदावार से लागत निकल जाएगी, लेकिन बारिश की कमी ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया।

किसान के अनुसार, पौधे तो बड़े हो गए, लेकिन पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण उनमें अपेक्षित फल नहीं आए। लगातार बढ़ते खर्च और फसल से आमदनी की उम्मीद खत्म होने के बाद उन्होंने खेत में खड़ी पपीते की फसल को ही नष्ट करने का फैसला किया।

विधायक के सामने किसान ने उजाड़ दी फसल

जिस समय किसान खेत में रोटावेटर चला रहा था, उसी दौरान एनसीपी नेता और विधायक रोहित पवार इलाके में सूखे की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे थे। उन्होंने किसान को फसल नष्ट करते देखा तो मौके पर रुककर उसकी परेशानी सुनी।

किसान ने बताया कि उसने फसल पर लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन पानी की कमी के चलते उसे उत्पादन नहीं मिल सका। रोहित पवार ने किसान से कहा कि सरकारी अधिकारियों की ओर से फसल नुकसान का पंचनामा किया जा रहा है, इसलिए फिलहाल फसल को नष्ट नहीं करना चाहिए। हालांकि किसान ने कहा कि उसके खेत तक अभी तक कोई अधिकारी नहीं पहुंचा है।

धुले में सूखे से किसान परेशान

धुले जिले के कई हिस्से इस साल सूखे की स्थिति से प्रभावित हैं। सकरी समेत जिले के चारों तालुके सूखा प्रभावित घोषित किए गए हैं। शुरुआती बारिश के बाद लंबे समय तक बारिश नहीं होने से किसानों की खरीफ फसलों पर भी असर पड़ा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सकरी में मानसून के दौरान 102 दिनों में 67 दिन बारिश नहीं हुई, जबकि लगातार 22 दिनों तक बारिश नहीं हुई।

मदद को लेकर उठे सवाल

रोहित पवार ने किसानों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले साल हुए फसल नुकसान की मदद भी कई किसानों तक नहीं पहुंची है। उन्होंने बताया कि इस साल पंचनामा प्रक्रिया शुरू हुई है, लेकिन फलबाग लगाने में प्रति एकड़ लाखों रुपये खर्च होने के मुकाबले सरकारी सहायता काफी कम हो सकती है।

पपीते की फसल पर रोटावेटर चलाने की घटना ने धुले में सूखे की गंभीरता और किसानों की आर्थिक परेशानी को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब किसानों की नजर प्रशासन की ओर से मिलने वाली राहत और फसल नुकसान के आकलन पर है।