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बच्चों पर मंडरा रहा HFMD का खतरा; सबसे ज्यादा चपेट में इस उम्र के बच्चे, जानें लक्षण
 

 

बच्चों में इन दिनों हैंड, फुट एंड माउथ डिजीज यानी HFMD को लेकर चिंता बढ़ रही है। यह एक वायरल संक्रमण है, जो खासतौर पर छोटे बच्चों को प्रभावित करता है। बीमारी का नाम ही इसके प्रमुख लक्षणों की ओर इशारा करता है। संक्रमित बच्चे के हाथ-पैर पर दाने या फफोले और मुंह के अंदर छाले दिखाई दे सकते हैं। कई मामलों में शुरुआत बुखार और गले में खराश जैसे लक्षणों से होती है।

HFMD का खतरा खासतौर पर 5 साल से कम उम्र के बच्चों में अधिक देखा जाता है। हालांकि बड़े बच्चे और कभी-कभी वयस्क भी इससे संक्रमित हो सकते हैं। छोटे बच्चों में संक्रमण तेजी से फैलने की एक बड़ी वजह यह है कि वे स्कूल, डे-केयर या खेल के दौरान एक-दूसरे के काफी करीब रहते हैं और हाथ-मुंह की साफ-सफाई का ध्यान हमेशा नहीं रख पाते।

क्या है HFMD

हैंड, फुट एंड माउथ डिजीज आमतौर पर एंटरोवायरस समूह के वायरस से होने वाला संक्रमण है। यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क, खांसने-छींकने से निकलने वाली बूंदों, लार, नाक के स्राव और संक्रमित सतहों के संपर्क से फैल सकती है। संक्रमित बच्चे के मल के संपर्क से भी वायरस फैलने का खतरा रहता है।

बीमारी की शुरुआत में बच्चे को हल्का या तेज बुखार, भूख कम लगना, थकान और गले में दर्द हो सकता है। इसके बाद मुंह के अंदर, जीभ या मसूड़ों के आसपास छोटे-छोटे छाले दिखाई दे सकते हैं। हाथों और पैरों पर लाल दाने या छोटे फफोले भी निकल सकते हैं। कुछ बच्चों में ये दाने घुटनों, कोहनी या शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी दिखाई दे सकते हैं।

बच्चों में दिखें ये लक्षण तो रहें सतर्क

HFMD के दौरान मुंह में छाले होने के कारण बच्चे को खाना या पानी निगलने में परेशानी हो सकती है। छोटे बच्चे चिड़चिड़े हो सकते हैं और सामान्य से कम खाना-पीना शुरू कर सकते हैं। बुखार के साथ हाथ-पैर या मुंह के आसपास दाने दिखाई देना इस बीमारी का प्रमुख संकेत हो सकता है।

अधिकांश मामलों में बीमारी कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है। हालांकि बच्चे को पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ देना जरूरी है, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। बुखार या दर्द के लिए दवा देने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।

संक्रमण से बचाव कैसे करें

HFMD से बचाव के लिए बच्चों के हाथ साबुन और पानी से नियमित रूप से धुलवाएं। खासतौर पर खाना खाने से पहले और टॉयलेट इस्तेमाल करने के बाद हाथ साफ करना जरूरी है। बच्चों को संक्रमित व्यक्ति के साथ बर्तन, गिलास, तौलिया या अन्य निजी सामान साझा करने से बचाना चाहिए।

घर में किसी बच्चे में लक्षण दिखाई दें तो उसे दूसरे बच्चों से कुछ समय अलग रखना और स्कूल या डे-केयर भेजने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना उचित है। जिन बच्चों को तेज बुखार हो, वे पानी न पी पा रहे हों, बहुत सुस्त दिखें या लक्षण तेजी से बढ़ रहे हों, उन्हें तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।