×

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- ‘क्या आप खुद को लॉर्ड समझते हैं?’ कौन हैं IAS तुकाराम मुंढे, जिनके एक्शन की हो रही चर्चा

 

महाराष्ट्र के चर्चित आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनके नेतृत्व वाले फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी FDA की कार्रवाई और उस पर बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी है। कोर्ट ने FDA के रवैये पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि क्या अधिकारी खुद को ‘लॉर्ड’ समझते हैं। अदालत की इस टिप्पणी के बाद तुकाराम मुंढे की कार्यशैली, उनके फैसलों और अब तक के प्रशासनिक करियर की चर्चा तेज हो गई है।

दरअसल, महाराष्ट्र FDA ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित पांच फूड आउटलेट्स पर कार्रवाई की थी। 20 अगस्त को निरीक्षण के बाद इन आउटलेट्स के FSSAI लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गए। मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा तो अदालत ने FDA की कार्रवाई और रिपोर्ट पर सवाल उठाए। बाद की सुनवाई में FDA की रिपोर्ट में रेस्टोरेंट द्वारा 88 प्रतिशत मानक पूरे किए जाने की बात सामने आई, लेकिन लाइसेंस सस्पेंशन बरकरार रखा गया।

29 अगस्त की सुनवाई के दौरान अदालत ने FDA के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि जब हाइजीन से जुड़े मुद्दे पर सुधार का निर्देश दिया गया था, तो FDA नई दलील लेकर क्यों आया। अदालत ने कार्रवाई को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए अवमानना की चेतावनी भी दी और आखिरकार संबंधित सस्पेंशन ऑर्डर रद्द कर दिए।

कौन हैं तुकाराम मुंढे?

तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र के बीड जिले के ताडसोन्ना गांव से आते हैं। एक साधारण किसान परिवार में जन्मे मुंढे ने कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई की। उनकी शुरुआती जिंदगी संघर्षों से भरी रही। खेत में काम करने से लेकर पढ़ाई जारी रखने तक उन्होंने कई मुश्किलों का सामना किया। बाद में उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की और प्रशासनिक सेवा में पहुंचे।

मुंढे की पहचान ऐसे अधिकारी के तौर पर बनी, जो नियमों को सख्ती से लागू करने और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने अवैध रेत खनन, टैक्स चोरी, पानी की व्यवस्था और नगर प्रशासन से जुड़े मामलों में कार्रवाई की। उनकी सख्त कार्यशैली के कारण कई बार वे विवादों में भी रहे हैं।

25 से ज्यादा ट्रांसफर, फिर भी नहीं बदली कार्यशैली

तुकाराम मुंढे के करियर में लगातार तबादले भी चर्चा का विषय रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 21 साल की सेवा में उनका 25 से अधिक बार ट्रांसफर हुआ है। कई मौकों पर उनके फैसलों से स्थानीय नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मतभेद भी सामने आए। इसके बावजूद मुंढे अपनी कार्यशैली को लेकर लगातार चर्चा में बने रहे।

FDA कमिश्नर बनने के बाद तेज हुई कार्रवाई

25 मई 2026 को महाराष्ट्र FDA के कमिश्नर की जिम्मेदारी संभालने के बाद मुंढे के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा को लेकर कई बड़े अभियान चलाए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, उनके कार्यकाल में FDA ने 1100 से ज्यादा छापे और 3100 से अधिक निरीक्षण किए हैं। 165 से ज्यादा लाइसेंस सस्पेंड किए गए और 50 करोड़ रुपये से अधिक का सामान जब्त किया गया।

FDA ने क्विक-कॉमर्स कंपनियों के वेयरहाउस, होटल, रेस्टोरेंट और खाद्य कारोबार से जुड़े कई प्रतिष्ठानों की जांच की। कुछ मामलों में लाइसेंस निलंबित किए गए। इसके अलावा भ्रामक विज्ञापनों और प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों के कथित प्रचार को लेकर फिल्मी सितारों को भी नोटिस भेजे गए।

सख्ती के साथ विवाद भी

मुंढे की कार्यशैली की जहां कुछ लोग तारीफ करते हैं, वहीं उनके खिलाफ यह आरोप भी लगते रहे हैं कि वे प्रशासनिक शक्तियों का बेहद सख्ती से इस्तेमाल करते हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट की हालिया टिप्पणियों ने इसी बहस को फिर सामने ला दिया है।

मुंढे का पक्ष रहा है कि वे नियमों के दायरे में रहकर काम करते हैं और उनका उद्देश्य व्यवस्था में सुधार करना है। उनकी कार्यशैली को लेकर समर्थकों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दे पर सख्त कार्रवाई जरूरी है, जबकि आलोचकों का तर्क है कि कार्रवाई कानून की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार और संतुलित तरीके से होनी चाहिए।

फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद तुकाराम मुंढे एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में हैं। उनकी कहानी यह भी बताती है कि प्रशासन में सख्त और तेज फैसले लेने वाले अधिकारियों की लोकप्रियता के साथ विवाद भी अक्सर जुड़े रहते हैं।