बीएमसी मेयर घमासान के बीच एकनाथ शिंदे का बड़ा बयान: ग्रैंड अलायंस का मेयर होगा
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना के सर्वेसर्वा एकनाथ शिंदे ने मुंबई मेयर पद को लेकर मची सियासी हलचल के बीच सोमवार को बड़ा बयान दिया। शिंदे ने मुंबई के होटल ताज लैंड एंड में नवनिर्वाचित पार्षदों से मुलाकात के बाद कहा कि मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) में ग्रैंड अलायंस (महायुति) का मेयर होगा।
शिंदे का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना यूबीटी (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की तरफ से उन पर लगातार निशाना साधा जा रहा था। यूबीटी गुट का दावा है कि अगर शिंदे “जयचंद” नहीं बनते, तो बीएमसी में बीजेपी का मेयर पद कभी नहीं बन पाता। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है और बीएमसी की मेयर कुर्सी को लेकर सस्पेंस और बढ़ गया है।
शिंदे ने साफ किया कि जहां भी हम अलायंस में लड़े, वहां ग्रैंड अलायंस का मेयर ही बनेगा। उन्होंने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि शिवसेना मेयर पद पर दावा करेगी या नहीं। यह बयान मुंबई के सियासी परिदृश्य में कई तरह की भविष्यवाणियों और अटकलों को जन्म दे रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शिंदे का यह बयान न केवल शिवसेना के आंतरिक संघर्ष को उजागर करता है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में सत्ता का समीकरण अभी भी अस्थिर है। शिंदे और उद्धव गुट के बीच जारी खींचतान के बीच यह साफ है कि बीएमसी में मेयर पद पर किसी एक गुट का कब्जा अभी तय नहीं हुआ है।
बीएमसी का मेयर पद सिर्फ शहर के प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं है। यह पद महाराष्ट्र और केंद्र की राजनीति में भी अहम भूमिका निभाता है। इसलिए राजनीतिक दल हर कदम पर रणनीति और गठबंधन समीकरणों को लेकर सतर्क हैं। शिंदे ने अपने बयान में यह संकेत दिया कि वे गठबंधन को बनाए रखने और अलायंस के पक्ष में स्थिति बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शिंदे का बयान बीजेपी और शिवसेना के बीच सत्ता संतुलन को प्रभावित कर सकता है। शिंदे गुट के पार्षदों की बैठक, उन्हें होटल में अलग-थलग रखकर की गई रणनीतियाँ, और बयानबाजी का यह दौर बीएमसी की सियासत को और पेचीदा बना रहा है।
शिंदे ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में अलायंस में शामिल सभी दलों के मतों और फैसलों को प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट नहीं किया कि इस प्रक्रिया में शिवसेना के हिस्से की मेयर कुर्सी का क्या होगा। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम यूबीटी गुट के हमलों का जवाब है और शिंदे गुट के प्रभाव को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।
इस बीच, मुंबईवासियों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आखिरकार बीएमसी में मेयर पद किस गुट के हाथ में जाएगा। शिंदे का बयान स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि ग्रैंड अलायंस के भीतर सत्ता-संतुलन और गठबंधन रणनीति अगले कुछ दिनों में बीएमसी की राजनीति को निर्धारित करेगी।