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नंदुरबार में अक्षय तृतीया पर अनोखी परंपरा, मजदूरों की ताकत की होती है परीक्षा

 

महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में अक्षय तृतीया के अवसर पर एक अनोखी और पारंपरिक परंपरा देखने को मिलती है, जो स्थानीय ग्रामीण समाज में श्रमिकों की शारीरिक क्षमता और मेहनत का प्रतीक मानी जाती है।

इस परंपरा के तहत खेतों में काम के लिए मजदूरों का चयन उनकी ताकत की परीक्षा के आधार पर किया जाता है। इसमें मजदूरों को लगभग 90 किलो वजन का एक भारी पत्थर उठाकर अपनी शारीरिक क्षमता साबित करनी होती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसे श्रमिकों की मेहनत और सहनशक्ति का मूल्यांकन करने का तरीका माना जाता है। जो मजदूर इस चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा कर लेते हैं, उन्हें खेतों में काम के लिए बेहतर अवसर और सालभर का निश्चित काम दिया जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रक्रिया से न केवल मेहनती मजदूरों की पहचान होती है, बल्कि उन्हें स्थायी रोजगार का अवसर भी मिलता है। हालांकि, यह परंपरा समय-समय पर चर्चा का विषय भी बनती रही है, क्योंकि इसमें शारीरिक रूप से कठिन परीक्षा शामिल होती है।

स्थानीय स्तर पर इसे पारंपरिक रोजगार चयन प्रणाली के रूप में देखा जाता है, जो आधुनिक भर्ती प्रक्रियाओं से अलग है। कुछ लोग इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का हिस्सा मानते हैं, जबकि कुछ इसे बदलते समय के साथ सुधार की जरूरत वाली परंपरा बताते हैं।

फिलहाल अक्षय तृतीया के मौके पर इस परंपरा को लेकर गांवों में उत्साह देखा जाता है और बड़ी संख्या में मजदूर इसमें हिस्सा लेते हैं।