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बीएमसी चुनावों के बाद मुंबई में मेयर पद को लेकर सस्पेंस, संजय राउत ने फोड़ा बड़ा बयान

 

बीएमसी चुनावों के नतीजे घोषित होने के बाद मुंबई में नया मेयर कब बनेगा, इसको लेकर सियासी सस्पेंस बरकरार है। शहर के सबसे बड़े नगर निगम में सत्ता की समीकरण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाए हैं, और राजनीतिक हलचल लगातार बढ़ती जा रही है।

मौजूदा परिस्थितियों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में दावोस में हैं, जबकि बीजेपी के अन्य बड़े नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए दिल्ली में व्यस्त हैं। इस बीच उद्धव ठाकरे गुट के नेता और शिवसेना के वरिष्ठ सांसद संजय राउत ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में बड़ा बयान दिया, जिसने न केवल मुंबई की सियासत बल्कि दिल्ली और दावोस तक राजनीतिक हलचल पैदा कर दी।

संजय राउत ने कहा कि केंद्र की सत्ता में बैठे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि बीजेपी का मेयर मुंबई में बने। हालांकि राउत ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह संभव कैसे होगा, क्योंकि बीजेपी के पास बीएमसी में पूरा बहुमत नहीं है। उनके बयान ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं और शहर में नई सियासी चर्चा को जन्म दिया है।

सूत्रों के अनुसार, शिंदे गुट के जीतने वाले उम्मीदवारों को ताज लैंड्स एंड होटल में लगभग कैदियों की तरह रखा गया है। बताया जा रहा है कि उनके आने-जाने पर कड़ी निगरानी है और बैठकें भी नियंत्रित रूप से आयोजित की जा रही हैं। वहीं, अन्य नेताओं और समर्थकों के लिए यह होटल लगभग जेल का रूप ले चुका है, जिससे राजनीतिक गतिविधियों पर सटीक नियंत्रण रखा जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति यह सुनिश्चित करने के लिए की गई है कि कोई भी गठबंधन टूटने या अप्रत्याशित रूप से वोट बदलने की स्थिति उत्पन्न न हो। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बीएमसी में मेयर चुनाव का परिणाम केवल बहुमत वाले दलों पर निर्भर नहीं है, बल्कि गठबंधनों और बाहरी दबावों के समीकरण पर भी तय होगा।

बीएमसी का मेयर पद न केवल शहर के प्रशासनिक कामकाज के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह राज्य और केंद्र की राजनीति में भी अहम भूमिका निभाता है। इसलिए, जीतने वाले उम्मीदवारों की बैठकें, गठबंधन की रणनीतियां और राजनीतिक बयानबाजी लगातार मीडिया और जनता के लिए चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

शहर के राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि मुंबई में मेयर के चुनाव को लेकर इस तरह का सस्पेंस पहले कभी इतना गहरा नहीं रहा। केंद्रीय और राज्य स्तर पर नेताओं की अनुपस्थिति, उम्मीदवारों के होटल में अलग-थलग रखे जाना और गठबंधन के भीतर की खींचतान ने माहौल को और नाजुक बना दिया है।

इस समय सभी राजनीतिक दल और उनके नेता सार्वजनिक बयानबाजी, मीडिया संपर्क और अंदरूनी बैठकें कर स्थिति को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रहे हैं। सियासी हलचल का यह दौर अगले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है, जब तक कि मेयर पद के लिए अंतिम निर्णय नहीं हो जाता।

मुंबईवासियों और राजनीतिक विशेषज्ञों की नजरें अब इस बात पर टिक गई हैं कि बीजेपी बहुमत न होने के बावजूद अपने उम्मीदवार को कैसे मजबूती से आगे बढ़ाएगी, और शिवसेना शिंदे गुट तथा उद्धव गुट इस चुनौती का सामना कैसे करेंगे। इस बीच, संजय राउत के बयान ने पूरे राजनीतिक परिदृश्य में हलचल पैदा कर दी है और बीएमसी के मेयर पद को लेकर सस्पेंस को और बढ़ा दिया है।