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ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अभिजीत दिपके का ऐलान, देशभर में आंदोलन के बाद जंतर-मंतर पहुंचने की चेतावनी

 

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो संगठन देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन करेगा और अक्टूबर के अंत में दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन किया जाएगा। दिपके ने यह घोषणा मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच की है।

मुंबई से शुरू होगा आंदोलन

अभिजीत दिपके के मुताबिक, CJP ने 2 अक्टूबर से मुंबई में आंदोलन शुरू करने का फैसला किया है। इसके बाद प्रदर्शन को देश के अन्य राज्यों और शहरों तक ले जाने की योजना है। उन्होंने गोवा, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में आंदोलन की बात कही है।

CJP ने मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन का ऐलान किया था। हालांकि, पुलिस की ओर से वहां प्रदर्शन की अनुमति को लेकर आपत्ति जताई गई है। पुलिस ने बॉम्बे हाईकोर्ट के पुराने आदेश और शिवाजी पार्क को लेकर लागू प्रतिबंधों का हवाला दिया है।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को अपनी प्रमुख मांग बताया है। CJP का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। संगठन ने 2025 की मतदाता सूची को फ्रीज करने और उसी आधार पर चुनाव कराने की मांग भी रखी है।

इसके अलावा संगठन ने भविष्य में मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने और इसमें नागरिक समाज की भागीदारी की मांग की है। ये CJP की मांगें और दावे हैं।

अक्टूबर के अंत में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन

दिपके ने कहा है कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो आंदोलन को दिल्ली तक ले जाया जाएगा। उनके मुताबिक, अक्टूबर के आखिर में जंतर-मंतर पर धरना दिया जाएगा और वहां भी प्रदर्शन जारी रखने की योजना है।

इसी बीच 2 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अलग छात्र और सामाजिक संगठनों ने भी CEC के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया है। दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है और इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई है।

CJP और अन्य प्रदर्शनकारी संगठन SIR तथा मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग इन प्रक्रियाओं को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत किए जाने की बात कहता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इन मुद्दों को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी रहने की संभावना है।