नालासोपारा में दर्दनाक हादसा, रेबीज से 9 साल की बच्ची की मौत
महाराष्ट्र के पालघर जिले के नालासोपारा से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक 9 साल की मासूम बच्ची की कुत्ते के काटने के करीब पांच महीने बाद रेबीज के कारण मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
मृतका की पहचान कशिश साहनी के रूप में हुई है, जो नालासोपारा पश्चिम स्थित सुबोध सागर बिल्डिंग में अपने परिवार के साथ रहती थी। कशिश चौथी कक्षा में पढ़ती थी और अपने परिवार की बेहद प्यारी थी।
जानकारी के अनुसार, बच्ची को कुछ महीने पहले एक कुत्ते ने काट लिया था। उस समय परिजन ने शुरुआती इलाज कराया, लेकिन समय के साथ उसकी तबीयत बिगड़ती गई। आखिरकार, रेबीज संक्रमण के कारण उसकी मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कुत्ते के काटने के बाद समय पर और पूरी तरह से इलाज कितना जरूरी होता है।
रेबीज एक जानलेवा बीमारी है, जो संक्रमित जानवर के काटने से फैलती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि समय रहते उचित टीकाकरण और उपचार नहीं कराया जाए, तो यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है। इस मामले में भी शुरुआती लापरवाही या अधूरे इलाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इस दुखद घटना के बाद इलाके में शोक की लहर है। स्थानीय लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है और प्रशासन से इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है। साथ ही, आवारा कुत्तों की समस्या और उनके नियंत्रण को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्ते के काटने के तुरंत बाद घाव को साफ पानी और साबुन से धोना चाहिए और बिना देर किए एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाना चाहिए। समय पर टीकाकरण इस जानलेवा बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि पालतू और आवारा जानवरों के काटने को हल्के में न लें और तुरंत उचित चिकित्सा सहायता प्राप्त करें, ताकि ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।