गांव में अवैध शराब के खिलाफ महिलाओं का फूटा गुस्सा, देर रात पुलिस चौकी पहुंचकर सौंपा ज्ञापन
मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के ग्राम मोहन्द्र में अवैध शराब की बिक्री और शराबियों की बढ़ती गुंडागर्दी से परेशान ग्रामीण महिलाओं का सब्र आखिरकार टूट गया। गांव की दर्जनों महिलाएं 31 जुलाई की देर रात एकजुट होकर पुलिस चौकी मोहन्द्र पहुंचीं और चौकी प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर गांव में अवैध शराब की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने तथा शांति व्यवस्था बनाए रखने की मांग की।
महिलाओं का आरोप है कि गांव में लंबे समय से खुलेआम अवैध शराब बेची जा रही है। इसके कारण आए दिन शराब के नशे में धुत लोग सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर हंगामा करते हैं। शराबी महिलाओं और युवतियों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं, जिससे गांव का माहौल लगातार खराब होता जा रहा है। शाम ढलते ही महिलाएं और बच्चे घरों से निकलने में असुरक्षित महसूस करते हैं।
ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि कई बार स्थानीय स्तर पर अवैध शराब की बिक्री रोकने की कोशिश की गई, लेकिन कोई स्थायी कार्रवाई नहीं होने से समस्या लगातार बढ़ती गई। उनका कहना है कि शराब के कारण कई परिवारों की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है। नशे की लत के चलते घरेलू विवाद बढ़ रहे हैं और कई घरों में आए दिन झगड़े हो रहे हैं।
ज्ञापन में महिलाओं ने पुलिस प्रशासन से मांग की कि गांव में अवैध शराब बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही नियमित पुलिस गश्त बढ़ाई जाए ताकि शराबियों द्वारा किए जाने वाले उपद्रव पर रोक लग सके और ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित माहौल मिल सके।
महिलाओं ने यह भी कहा कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो गांव में कानून-व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ सकती है। उन्होंने प्रशासन से चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण महिलाएं बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगी।
पुलिस चौकी प्रभारी ने महिलाओं की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उन्हें भरोसा दिलाया कि मामले की जांच कराई जाएगी। अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और गांव में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि पुलिस और आबकारी विभाग संयुक्त रूप से अभियान चलाकर अवैध शराब के अड्डों पर कार्रवाई करे तो इस समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। फिलहाल गांव की महिलाओं को प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उनकी शिकायत पर कितना प्रभावी कदम उठाया जाता है।