मानसून की दस्तक के साथ बढ़ी प्रशासन की चिंता, जर्जर सरकारी मकान और अपार्टमेंट बने खतरे की वजह
मानसून की शुरुआत के साथ ही शहर में दशकों पुराने और जर्जर हो चुके सरकारी मकानों तथा अपार्टमेंट्स को लेकर प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। लगातार बारिश के कारण इन इमारतों की स्थिति और कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार कई सरकारी आवास और बहुमंजिला अपार्टमेंट लंबे समय से मरम्मत के इंतजार में हैं। इनमें दीवारों में दरारें, छत से पानी का रिसाव, कमजोर बीम और जंग लगे ढांचे जैसी समस्याएं सामने आ चुकी हैं। बरसात के मौसम में इन भवनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने से जोखिम और बढ़ जाता है।
नगर निगम और संबंधित विभागों ने ऐसे भवनों की सूची तैयार करना शुरू कर दिया है, जिन्हें अत्यधिक जर्जर माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जिन इमारतों की हालत अधिक खराब है, वहां रहने वाले लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जा रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समय पर मरम्मत नहीं हो पाई। अब बारिश शुरू होने के बाद उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। कुछ भवनों में रात के समय प्लास्टर गिरने और पानी भरने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पुराने भवनों की नियमित संरचनात्मक जांच और समय पर मरम्मत बेहद जरूरी है। यदि जर्जर भवनों को बिना निरीक्षण के उपयोग में रखा गया तो भारी बारिश के दौरान दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है।
प्रशासन ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे संवेदनशील भवनों का तत्काल निरीक्षण करें और जहां आवश्यक हो वहां सुरक्षा उपाय लागू करें। साथ ही नागरिकों से भी अपील की गई है कि किसी भवन में दरार, झुकाव या अन्य खतरनाक संकेत दिखाई दें तो तुरंत प्रशासन को सूचना दें।
मानसून के मौसम में जर्जर सरकारी मकानों और अपार्टमेंट्स की स्थिति प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि संभावित खतरे को टालने के लिए विभाग कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं।