कान्हा टाइगर रिजर्व में वायरस का कहर, बाघिन समेत 4 शावकों की मौत
मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व में ‘कैनाइन डिस्टेंपर वायरस’ का प्रकोप सामने आया है, जिससे एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत हो गई। इस घटना ने वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
वन अधिकारियों के अनुसार, यह वायरस आमतौर पर कुत्तों में पाया जाता है, लेकिन अब इसका असर वन्यजीवों, खासकर बड़े मांसाहारी जानवरों पर भी देखने को मिल रहा है। संक्रमण की आशंका को देखते हुए जंगल के करीब 2 किलोमीटर क्षेत्र को पूरी तरह सील कर दिया गया है, ताकि वायरस का फैलाव रोका जा सके।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने आसपास के गांवों में कुत्तों के लिए व्यापक टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि घरेलू और आवारा कुत्तों के जरिए यह वायरस जंगल में पहुंच सकता है, इसलिए रोकथाम के उपाय जरूरी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कैनाइन डिस्टेंपर वायरस बाघों के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है, क्योंकि यह उनके तंत्रिका तंत्र और श्वसन प्रणाली को प्रभावित करता है। इससे संक्रमित जानवरों की मौत की संभावना काफी अधिक होती है।
वन विभाग की टीमें लगातार इलाके की निगरानी कर रही हैं और अन्य वन्यजीवों में संक्रमण के लक्षणों की जांच की जा रही है। साथ ही, रिजर्व में पर्यटकों की आवाजाही पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है।
इस घटना ने एक बार फिर मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संपर्क और उससे उत्पन्न खतरों की ओर ध्यान आकर्षित किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के संक्रमण को रोकने के लिए दीर्घकालिक रणनीति और सतत निगरानी आवश्यक है। फिलहाल, प्रशासन और वन विभाग स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं, ताकि इस घातक वायरस के प्रसार को रोका जा सके।