गर्भवती महिला को झोली में उठाकर 4 किलोमीटर दौड़े ग्रामीण, घुटनों तक पानी में चलकर पहुंचाया अस्पताल; 12 साल से पुल का इंतजार
एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। रास्ते में पानी भरा होने और पुल नहीं होने के कारण लोगों ने महिला को झोली में उठाया और करीब 4 किलोमीटर तक दौड़ते हुए उसे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की कोशिश की। इस दौरान ग्रामीण घुटनों तक भरे पानी से होकर गुजरे। घटना ने इलाके में बुनियादी सुविधाओं की कमी और ग्रामीणों की मुश्किलों को उजागर किया है।
जानकारी के अनुसार, गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने के लिए ग्रामीणों को सामान्य सड़क मार्ग का सहारा नहीं मिल सका। रास्ते में पानी भरा होने के कारण वाहन से आवाजाही करना मुश्किल था। ऐसे में ग्रामीणों ने मिलकर महिला को झोली में उठाया और पैदल ही निकल पड़े। महिला को समय पर चिकित्सा सहायता दिलाने के लिए ग्रामीण करीब 4 किलोमीटर तक दौड़े।
घुटनों तक पानी से होकर निकले ग्रामीण
रास्ते में पानी भरा होने के कारण ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। गर्भवती महिला को झोली में उठाकर लोग घुटनों तक पानी में चले। इस दौरान उनकी प्राथमिकता महिला को जल्द से जल्द चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना था।
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और पुल जैसी सुविधाओं का अभाव आपातकालीन परिस्थितियों में बड़ी समस्या बन जाता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के दौरान ऐसी परिस्थितियां जोखिम बढ़ा सकती हैं। इस घटना में भी ग्रामीणों को महिला को ले जाने के लिए खुद ही व्यवस्था करनी पड़ी।
12 साल पहले हुआ था सर्वे, अब तक नहीं बना पुल
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, इस क्षेत्र में पुल बनाने के लिए करीब 12 साल पहले सर्वे किया गया था। इसके बावजूद अब तक पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। पुल नहीं होने के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही है।
ग्रामीणों के लिए यह समस्या केवल रोजमर्रा के आने-जाने तक सीमित नहीं है। बरसात या पानी बढ़ने की स्थिति में रास्ता पार करना और भी मुश्किल हो सकता है। ऐसे में किसी मरीज या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
ग्रामीणों को अब भी बुनियादी सुविधा का इंतजार
इस घटना के बाद पुल निर्माण में देरी का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग और प्रशासन उनकी समस्या पर ध्यान देंगे तथा पुल निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में गांव का नाम, गर्भवती महिला की वर्तमान स्थिति और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है। इन विवरणों के सामने आने पर मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, गर्भवती महिला को झोली में उठाकर करीब 4 किलोमीटर तक ले जाने की घटना ग्रामीण क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की जरूरत को रेखांकित करती है।