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65 टेंडर निरस्त होने पर नपाध्यक्ष नाराज, सिंधिया को पत्र; इस्तीफे की चेतावनी, अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप

 

गुना नगरपालिका में विकास कार्यों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। नगर पालिका अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता ने केंद्रीय मंत्री और क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को तीन पन्नों का पत्र भेजकर नगरपालिका के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। नपाध्यक्ष ने पत्र में करीब 65 विकास कार्यों के टेंडर निरस्त या अटकाए जाने और 800 से ज्यादा फाइलों के लंबित होने का दावा किया है। उन्होंने कहा है कि लगातार ऐसी परिस्थितियां बनाई जा रही हैं, जिससे एक महिला जनप्रतिनिधि के स्वाभिमान को ठेस पहुंच रही है। हालात नहीं सुधरे तो उन्होंने इस्तीफा देने की चेतावनी भी दी है।

65 टेंडर निरस्त या अटकाने का आरोप

नपाध्यक्ष के मुताबिक, पिछले करीब 15 से 16 महीनों के दौरान नगरपालिका के तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर सह सीएमओ और वर्तमान सीएमओ के स्तर पर करीब 65 विकास कार्यों के टेंडर निरस्त या अटकाए गए। उनका आरोप है कि इन फैसलों की जानकारी उन्हें नहीं दी गई। उन्होंने पत्र में अधिकारियों की कार्यप्रणाली की जांच कराने की मांग भी उठाई है।

नपाध्यक्ष का कहना है कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि वही हैं, जबकि इस दौरान अधिकारियों में बदलाव हुआ है। ऐसे में नगरपालिका के कामकाज में आ रही रुकावटों की जिम्मेदारी और भूमिका की जांच होनी चाहिए।

800 से ज्यादा नामांतरण की फाइलें लंबित

पत्र में नपाध्यक्ष ने शहर की कई अन्य समस्याओं का भी जिक्र किया है। उनके अनुसार नगरपालिका में 800 से ज्यादा नामांतरण की फाइलें सीएमओ के हस्ताक्षर नहीं होने के कारण लंबित हैं। परिषद की बैठक बुलाने के लिए दिए गए पत्रों पर भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।

इसके अलावा उन्होंने शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया। उनके मुताबिक गुना में करीब 12 हजार स्ट्रीट लाइटें हैं, जिनमें लगभग 2 हजार लंबे समय से बंद हैं। रखरखाव के लिए पीआईसी की ओर से करीब 45 लाख रुपये की मंजूरी दिए जाने के बावजूद टेंडर प्रक्रिया में देरी होने का दावा पत्र में किया गया है।

विकास कार्यों पर भी उठाए सवाल

नपाध्यक्ष ने श्रीराम मुक्तिधाम और कैंट मुक्तिधाम के करीब डेढ़ करोड़ रुपये के विकास कार्यों की तकनीकी स्वीकृति लंबित होने की बात कही है। उनका कहना है कि इन प्रक्रियाओं में देरी का सीधा असर शहर के विकास कार्यों पर पड़ रहा है।

पत्र में उन्होंने कुछ लोगों पर राजनीतिक षड्यंत्र का आरोप भी लगाया है। नपाध्यक्ष का दावा है कि विधानसभा, लोकसभा और उपचुनावों में भाजपा की सफलता के बाद उन्हें और उनके पति अरविंद गुप्ता को राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उनका आरोप है कि अधिकारियों के माध्यम से नगरपालिका की व्यवस्थाओं को प्रभावित किया जा रहा है, ताकि इसकी जिम्मेदारी उनके ऊपर आए। ये आरोप नपाध्यक्ष की ओर से लगाए गए हैं।

महिला स्वाभिमान का मुद्दा, इस्तीफे की चेतावनी

सविता गुप्ता ने अपने पत्र में खुद को एक महिला जनप्रतिनिधि बताते हुए कहा है कि लगातार ऐसी परिस्थितियां बन रही हैं, जिनसे उनके स्वाभिमान को चोट पहुंच रही है। उन्होंने संकेत दिया है कि यदि हालात में सुधार नहीं हुआ और नगरपालिका के कामकाज में सहयोग नहीं मिला तो उन्हें अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

अब नपाध्यक्ष के इस पत्र के बाद नगरपालिका की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की भूमिका को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। मामले में संबंधित अधिकारियों या अन्य आरोपित पक्षों की ओर से प्रतिक्रिया सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।