हैंडओवर से पहले उज्जैन-गरोठ हाईवे फिर धंसा, 17 मीटर ऊंची सड़क का 500 मीटर हिस्सा ढहाना पड़ेगा
उज्जैन-गरोठ हाईवे के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 2600 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किए जा रहे इस हाईवे का एक हिस्सा हैंडओवर से पहले ही दोबारा धंस गया है। सड़क के करीब 17 मीटर ऊंचे हिस्से में समस्या सामने आने के बाद अब लगभग 500 मीटर सड़क को तोड़कर दोबारा निर्माण करने की जरूरत बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि हाईवे का निर्माण पूरा होने के बाद इसे संबंधित एजेंसी को हैंडओवर किया जाना था। इससे पहले ही सड़क के एक हिस्से में धंसाव सामने आया। निरीक्षण के दौरान स्थिति की गंभीरता का पता चला, जिसके बाद प्रभावित हिस्से को लेकर तकनीकी स्तर पर जांच और सुधार की प्रक्रिया शुरू की गई।
हाईवे का यह हिस्सा करीब 17 मीटर ऊंचा है। सड़क के नीचे मिट्टी और अन्य निर्माण सामग्री की मजबूती को लेकर सवाल उठ रहे हैं। धंसाव के बाद अधिकारियों और तकनीकी टीम ने प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। स्थिति को देखते हुए सड़क के करीब 500 मीटर हिस्से को हटाकर दोबारा निर्माण किए जाने की संभावना है।
उज्जैन-गरोठ हाईवे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण सड़क परियोजना है। करीब 2600 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहा यह मार्ग उज्जैन और गरोठ के बीच आवागमन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। हाईवे के निर्माण से क्षेत्र में यातायात सुविधा बढ़ने और यात्रा का समय कम होने की उम्मीद है।
हालांकि निर्माण पूरा होने से पहले सड़क के दोबारा धंसने की घटना ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले भी इस हाईवे के कुछ हिस्सों में धंसाव की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। ऐसे में अब तकनीकी जांच के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि सड़क के नीचे की संरचना में किस स्तर पर समस्या आई।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंची सड़क के निर्माण में मिट्टी की गुणवत्ता, लेयर की मजबूती, पानी की निकासी और पर्याप्त दबाव के साथ सामग्री बिछाना बेहद महत्वपूर्ण होता है। इनमें किसी स्तर पर कमी रहने पर बारिश या पानी के दबाव के कारण सड़क में धंसाव हो सकता है। हालांकि इस मामले में वास्तविक कारण तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
हैंडओवर से पहले सड़क में खामी सामने आने के कारण परियोजना की समयसीमा पर भी असर पड़ सकता है। करीब 500 मीटर हिस्से को दोबारा बनाने में अतिरिक्त समय और संसाधन लगेंगे। साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि सड़क का निर्माण पूरा होने के बाद ऐसी समस्या सामने आई है तो निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर की गई थी।
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की नजर अब सड़क की मरम्मत और दोबारा निर्माण पर है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपए की लागत से तैयार हो रहे हाईवे में गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। सड़क लंबे समय तक सुरक्षित और टिकाऊ रहे, इसके लिए निर्माण के हर चरण की तकनीकी जांच जरूरी है।
फिलहाल प्रभावित हिस्से की जांच के बाद करीब 500 मीटर सड़क को ढहाकर दोबारा तैयार करने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। हैंडओवर से पहले सामने आई इस खामी ने उज्जैन-गरोठ हाईवे की निर्माण गुणवत्ता को लेकर बहस छेड़ दी है। अब तकनीकी जांच और दोबारा निर्माण के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।