उज्जैन में फर्जी वारिस खड़ा कर जमीन का नामांतरण, सरपंच के बेटे के नाम रजिस्ट्री; हाईकोर्ट ने दिया 6 सप्ताह में निपटारे का निर्देश
जिले की बड़नगर तहसील के जलोदिया गांव में जमीन के कथित फर्जीवाड़े का मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद सामने आया है। आरोप है कि दशकों से बिना किसी वारिस के पड़ी जमीन पर फर्जी वारिस खड़ा कर उसका नामांतरण कराया गया। इसके बाद जमीन की रजिस्ट्री कथित तौर पर उसी सरपंच के बेटे के नाम करा दी गई, जिसके स्तर से वारिसाना प्रमाण पत्र जारी किया गया था।
मामले की सुनवाई इंदौर हाईकोर्ट में हुई। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पहले सक्षम राजस्व अधिकारी यानी कलेक्टर के समक्ष शिकायत प्रस्तुत करने को कहा। साथ ही कलेक्टर को शिकायत मिलने के बाद मामले का छह सप्ताह के भीतर नियमानुसार निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।
दशकों से खाली पड़ी थी जमीन
मामला बड़नगर तहसील के जलोदिया गांव की जमीन से जुड़ा है। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि संबंधित जमीन लंबे समय से बिना किसी वारिस के खाली पड़ी थी। बाद में जमीन पर एक व्यक्ति को कथित तौर पर वारिस के रूप में खड़ा किया गया और उसके आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण करा दिया गया।
नामांतरण के बाद जमीन के संबंध में आगे की प्रक्रिया भी की गई और आखिरकार इसकी रजिस्ट्री सरपंच के बेटे के नाम कराए जाने का आरोप है।
वारिसाना प्रमाण पत्र को लेकर सवाल
मामले में वारिसाना प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि जिस व्यक्ति को जमीन का वारिस बताया गया, वह वास्तविक वारिस नहीं था। इसी कथित फर्जी वारिस के आधार पर जमीन का नामांतरण कराया गया।
इसके बाद जमीन सरपंच के बेटे के नाम रजिस्टर्ड होने से पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया। याचिका में कथित फर्जीवाड़े की जांच और जमीन से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह अपनी शिकायत संबंधित कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत करे। अदालत ने कहा कि सक्षम अधिकारी शिकायत और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कर मामले का निराकरण करें।
कोर्ट ने कलेक्टर को निर्देश दिया कि शिकायत प्राप्त होने के बाद छह सप्ताह के भीतर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए मामले का फैसला किया जाए।
अब कलेक्टर के फैसले पर नजर
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब मामले में कलेक्टर स्तर पर जांच और कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। जमीन के पुराने रिकॉर्ड, नामांतरण की प्रक्रिया, वारिसाना प्रमाण पत्र और रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
यदि जांच में दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल हाईकोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर अंतिम फैसला देने के बजाय याचिकाकर्ता को प्रशासनिक स्तर पर शिकायत करने का रास्ता अपनाने के निर्देश दिए हैं।