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उज्जैन में आयुर्वेद छात्रों ने कॉलेज-अस्पताल के गेट पर जड़ा ताला: स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर 7 दिन से प्रदर्शन, डॉक्टरों और मरीजों को भी रोका

 

मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आयुर्वेद कॉलेज के छात्र-छात्राओं का प्रदर्शन लगातार जारी है। करीब 200 छात्र-छात्राएं पिछले सात दिनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कॉलेज और अस्पताल के गेट पर ताला जड़ दिया। इसके कारण डॉक्टरों और मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। छात्रों के इस कदम के बाद कॉलेज परिसर में स्वास्थ्य सेवाओं और अस्पताल आने वाले लोगों की आवाजाही को लेकर स्थिति गंभीर हो गई।

प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड उनकी जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। वे लंबे समय से इसमें बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। छात्रों का तर्क है कि चिकित्सा शिक्षा के दौरान पढ़ाई, प्रशिक्षण और अस्पताल में ड्यूटी से जुड़ी जिम्मेदारियों के बीच आर्थिक सहायता बढ़ाई जानी चाहिए। इसी मांग को लेकर विद्यार्थी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।

सात दिन से जारी है छात्रों का आंदोलन

आयुर्वेद कॉलेज के करीब 200 छात्र-छात्राएं पिछले सात दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। शुरुआत में अपनी मांगों को लेकर विरोध जताने के बाद अब छात्रों ने कॉलेज और अस्पताल के प्रवेश द्वार पर ताला लगाकर प्रदर्शन तेज कर दिया। छात्रों का उद्देश्य संबंधित अधिकारियों का ध्यान स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग की ओर आकर्षित करना है।

प्रदर्शन के दौरान गेट बंद होने से कॉलेज और अस्पताल में आने-जाने वाले लोगों को परेशानी हुई। डॉक्टरों और मरीजों को भी रोके जाने की जानकारी सामने आई है। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के लिए ऐसी स्थिति विशेष रूप से परेशानी का कारण बन सकती है, क्योंकि कई लोगों को समय पर चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है।

स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर अड़े विद्यार्थी

प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों की मुख्य मांग स्टाइपेंड में बढ़ोतरी करना है। छात्रों का कहना है कि उनकी मांग पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए और संबंधित प्रशासन को इस दिशा में ठोस निर्णय लेना चाहिए। सात दिनों से चल रहे आंदोलन के बावजूद मांग पूरी नहीं होने पर विद्यार्थियों ने विरोध का तरीका और सख्त कर दिया।

स्टाइपेंड का मुद्दा चिकित्सा शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण के दौरान मिलने वाली आर्थिक सहायता से विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने में मदद मिलती है। ऐसे में छात्र चाहते हैं कि उनकी आर्थिक जरूरतों और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए राशि बढ़ाई जाए।

मरीजों की परेशानी भी बनी चिंता का विषय

कॉलेज-अस्पताल के गेट पर ताला लगाए जाने और डॉक्टरों-मरीजों की आवाजाही रोके जाने से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है। विरोध प्रदर्शन के बीच मरीजों की सुविधा और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को सुचारु रखना भी जरूरी है। अस्पताल आने वाले लोगों को इलाज के लिए अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन की भूमिका अहम हो जाती है।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि कॉलेज प्रबंधन और संबंधित अधिकारी छात्रों से बातचीत कर समाधान निकालने के लिए क्या कदम उठाते हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है, तो आंदोलन समाप्त होने और अस्पताल की सामान्य व्यवस्था बहाल होने का रास्ता निकल सकता है। फिलहाल, स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर जारी प्रदर्शन ने उज्जैन के आयुर्वेद कॉलेज और अस्पताल की व्यवस्था को चर्चा में ला दिया है।