दो साल पहले ही दूषित पानी की जानकारी थी, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई; जांच रिपोर्ट पर उठे सवाल
ईनाणी ने दावा किया है कि जांच रिपोर्ट में नगर निगम के जल यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है। उनके अनुसार, अधिकारियों को करीब दो साल पहले ही क्षेत्र में पानी की समस्या और दूषित जल की आपूर्ति की जानकारी मिल गई थी। इसके बावजूद कथित तौर पर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
बताया गया कि अधिकारियों को यह भी पता था कि इलाके में लोगों के घरों तक दूषित पानी पहुंच रहा है। इसके बावजूद समस्या लंबे समय तक बनी रही। अब जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
ईनाणी के दावे के मुताबिक, यदि अधिकारियों को पहले ही दूषित पानी की स्थिति का पता था तो समय रहते जलस्रोतों की जांच, पाइपलाइन की मरम्मत और वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था जैसे कदम उठाए जाने चाहिए थे। करीब दो साल तक समस्या की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही के तौर पर देखा जा रहा है।
दूषित पानी की आपूर्ति सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है। ऐसे में पानी की गुणवत्ता को लेकर मिली शिकायतों पर तत्काल जांच और सुधार जरूरी होता है। अब सवाल यह है कि अधिकारियों को जानकारी मिलने के बावजूद समस्या का समाधान क्यों नहीं किया गया और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी।
फिलहाल जांच रिपोर्ट के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल की जा रही है। यदि रिपोर्ट में अधिकारियों की लापरवाही की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी तेज हो सकती है।