दो कत्ल, एक साजिश और कई झूठ: बेटी के नाम से छोड़ा फर्जी नोट, पोस्टमार्टम से DNA तक खुलती गई हत्या की परतें
दो हत्याओं के एक सनसनीखेज मामले में आरोपी ने पुलिस और जांच एजेंसियों को गुमराह करने के लिए कई झूठे सुराग तैयार किए। यहां तक कि बेटी के नाम से एक कथित नोट भी छोड़ा गया, ताकि हत्या की कहानी को अलग दिशा दी जा सके। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य और DNA जांच ने आरोपी की साजिश की परतें खोल दीं। आखिरकार मामला अदालत तक पहुंचा और आरोपी अपने बचाव में बनाई गई कहानी से नहीं बच सका।
मामले की शुरुआत दो लोगों की हत्या से हुई। शुरुआती तौर पर घटनाक्रम को ऐसा दिखाने की कोशिश की गई, जिससे जांच की दिशा भटक जाए। आरोपी की ओर से पेश की गई कहानी में कई ऐसे बिंदु थे, जिन पर जांच अधिकारियों को संदेह हुआ। पुलिस ने घटनास्थल की परिस्थितियों के साथ-साथ मृतकों की स्थिति और उपलब्ध साक्ष्यों को गंभीरता से जांचना शुरू किया।
बेटी के नाम से छोड़ा गया कथित नोट
जांच के दौरान एक ऐसा नोट सामने आया, जिसे बेटी के नाम से छोड़े जाने की बात कही गई। इस नोट के जरिए मामले को अलग रूप देने की कोशिश की गई थी। हालांकि जांचकर्ताओं ने नोट में लिखी बातों को अंतिम सच मानने के बजाय उसकी सत्यता और परिस्थितियों की पड़ताल की।
जांच में सामने आए अन्य साक्ष्यों से नोट की कहानी पर सवाल उठने लगे। पुलिस ने घटनास्थल से मिले सबूतों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों से मिलाकर देखा।
पोस्टमार्टम ने बदली जांच की दिशा
मृतकों के पोस्टमार्टम के दौरान सामने आए तथ्यों ने मामले की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मौत की परिस्थितियों से जुड़े संकेत आरोपी की बताई कहानी से मेल नहीं खा रहे थे। इसके बाद जांच टीम ने मामले को हत्या की साजिश के एंगल से और गहराई से खंगाला।
घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और आरोपियों से जुड़े तथ्यों की वैज्ञानिक जांच कराई गई। इसी क्रम में DNA जांच भी अहम साबित हुई।
DNA जांच से सामने आया अहम सुराग
DNA साक्ष्यों ने मामले को आरोपी से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वैज्ञानिक जांच से मिले तथ्यों को अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ अदालत के सामने रखा गया। अभियोजन पक्ष ने यह बताने का प्रयास किया कि आरोपी ने घटना के बाद जांच को गुमराह करने के लिए झूठी कहानी और फर्जी सुराग तैयार किए थे।
अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट, DNA सहित अन्य साक्ष्यों की कड़ियों को जोड़ा गया। आरोपी की ओर से पेश की गई कहानी इन साक्ष्यों के सामने टिक नहीं सकी।
जांच में खुलती गई साजिश की परतें
दो हत्याओं के मामले में आरोपी ने बचने के लिए कई स्तर पर कहानी गढ़ने की कोशिश की, लेकिन वैज्ञानिक जांच और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों ने उसकी मुश्किल बढ़ा दी। बेटी के नाम से छोड़ा गया कथित नोट भी आरोपी को बचाने में काम नहीं आया।
मामले ने यह भी दिखाया कि गंभीर अपराधों की जांच में केवल बयान या घटनास्थल की शुरुआती कहानी पर निर्भर रहने के बजाय पोस्टमार्टम, DNA और अन्य फोरेंसिक साक्ष्यों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है। जांच में जुटाए गए वैज्ञानिक प्रमाणों ने आखिरकार मामले की वास्तविकता सामने लाने में अहम भूमिका निभाई।